बाढ़ में खाट बनी एंबुलेंस, पश्चिम चंपारण में मरीज को नदी पार कराकर पहुंचाया अस्पताल
पश्चिम चंपारण में बाढ़ से रास्ता बंद होने पर ग्रामीणों ने एक बीमार महिला को खाट पर लादकर उफनती हरहा ...और पढ़ें
HighLights
बाढ़ में रास्ता बंद होने पर खाट बनी एंबुलेंस।
ग्रामीणों ने बीमार महिला को कंधे पर नदी पार कराई।
दोन क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी उजागर हुई।
संवाद सूत्र, हरनाटांड़ (बगहा)। पश्चिम चंपारण जिले के हरनाटांड में जिस खाट पर कभी परिवार के बुजुर्ग आराम करते थे, वही खाट एक बीमार महिला के लिए एंबुलेंस बन गई। हरहा नदी में बाढ़ के कारण रास्ता बंद था।
वाहन नदी पार नहीं कर सकता था। पेट और कमर में तेज दर्द से परेशान कुमारी देवी को इलाज के लिए हरनाटांड़ पहुंचाना जरूरी था। ऐसे में स्वजन और ग्रामीणों ने खाट को कंधे पर उठाया और बाढ़ का पानी पार कराकर अस्पताल पहुंचाया।
दर्द बढ़ा तो बढ़ी परेशानी
गर्दी दोन निवासी सुताही महतो की पत्नी कुमारी देवी चलने में असमर्थ हैं। सोमवार को अचानक उनके पेट और कमर में तेज दर्द शुरू हो गया। स्वजन ने गांव के ग्रामीण चिकित्सक से उपचार कराया, लेकिन आराम नहीं मिला। हालत में सुधार नहीं होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए हरनाटांड़ ले जाने की तैयारी शुरू हुई।
नदी बनी सबसे बड़ी बाधा
इसी दौरान पता चला कि हरहा नदी में बाढ़ आने से रास्ता बाधित है। वाहन से मरीज को ले जाना संभव नहीं था। मरीज की हालत को देखते हुए स्वजन ने ग्रामीणों से मदद मांगी। इसके बाद खाट पर कुमारी देवी को लिटाया गया और कई लोग उसे कंधे पर उठाकर नदी पार कराने में जुट गए।
कंधों पर अस्पताल तक का सफर
ग्रामीणों ने बाढ़ के पानी के बीच सावधानी से खाट को उठाकर नदी पार कराई। इसके बाद मरीज को हरनाटांड़ ले जाया गया, जहां उनका इलाज कराया गया। सामाजिक कार्यकर्ता अजय महतो व संदीप महतो ने बताया कि समय पर उपचार मिलना जरूरी था, इसलिए ग्रामीणों ने मिलकर रास्ता बनाया।
22 गांवों की यही मजबूरी
दोन क्षेत्र के 22 गांव बरसाती पहाड़ी नदियों से घिरे हैं। यहां करीब 70 हजार की आबादी रहती है। क्षेत्र में समुचित स्वास्थ्य सुविधा नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को हरनाटांड़ या रामनगर जाना पड़ता है। बरसात में हरहा नदी उफान पर आने के बाद यह दूरी और मुश्किल हो जाती है।
समय पर इलाज की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि हरहा नदी पर आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से हर साल बरसात में ऐसी स्थिति बनती है। गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। कई बार रास्ते की यह बाधा मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है।
