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बिहार की छात्राओं को तराश रहीं राजस्थान की बेटी, बेतिया में शिक्षा और करियर मार्गदर्शन से सशक्तीकरण

Published: Sun, 11 Oct 2026 05:34 PM (IST)

Career Guidance In Bihar: डॉ. बरखा चपलोत, एमजेके कॉलेज, बेतिया की प्राध्यापिका हैं, जो छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।

एमजेके कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ. बरखा चपलोत।

एमजेके कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ. बरखा चपलोत।

HighLights

  1. छात्राओं को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता सिखाती हैं।

  2. व्यावहारिक ज्ञान, डिजिटल साक्षरता, व्यावसायिक कौशल पर जोर।

  3. छोटे शहरों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय अवसरों से जोड़ती हैं।

संदेश तिवारी, बेतिया (पश्चिमी चंपारण)। Dr Barkha Chaplot Bettiah: ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, साधना और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। उनका स्वरूप लक्ष्य के प्रति समर्पण और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है।

छात्राओं के लिए प्रेरणस्रोत

कुछ ऐसी ही साधना शिक्षा के क्षेत्र में भी दिखाई देती है, जहां एक शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने के लिए निरंतर प्रयास करता है। एमजेके कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ. बरखा चपलोत इसी संकल्प के साथ छात्राओं को शिक्षा के साथ आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।

राजस्थान के उदयपुर से बेतिया तक का उनका सफर केवल एक प्राध्यापिका की नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अवसरों से जोड़ने और उनकी प्रतिभा निखारने की निरंतर कोशिश भी है।

योग्य बनाने पर बल

वर्ष 2018 से एमजेके कॉलेज में शिक्षण कार्य कर रहीं डॉ. बरखा चपलोत का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि युवाओं को इस योग्य बनाना है कि वे अपने फैसले स्वयं ले सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।

इसी सोच के तहत वह छात्र-छात्राओं को पारंपरिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान, डिजिटल साक्षरता, व्यावसायिक कौशल और करियर संबंधी मार्गदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं।

उनका प्रयास है कि छोटे शहरों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरते अवसरों से परिचित हों और अपनी क्षमता को पहचान सकें।

आत्मविश्वास जगाने की पहल

उदयपुर के मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं डॉ. बरखा चपलोत के लिए राजस्थान से बिहार आकर यहां के शैक्षणिक और सांस्कृतिक परिवेश में स्वयं को स्थापित करना शुरुआती दिनों में चुनौतीपूर्ण रहा।

स्थानीय भाषा, रहन-सहन और विद्यार्थियों की परिस्थितियों को समझते हुए उनके साथ जुड़ना आसान नहीं था। हालांकि, माता-पिता से मिले संस्कार और जैन दर्शन के सिद्धांतों ने उन्हें धैर्य और समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

आगे बढ़ने की प्रेरणा

एमजेके कॉलेज में उनकी प्राथमिकता केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है।

इसके लिए वह गतिविधि आधारित शिक्षण, समूह चर्चा, प्रस्तुतियों और विशेषज्ञों के व्याख्यानों को प्रोत्साहित करती हैं। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के नए क्षेत्रों की जानकारी देने के साथ उनकी व्यक्तिगत और शैक्षणिक समस्याओं को सुनने का भी प्रयास करती हैं।

उनका मानना है कि छोटे शहरों की अनेक प्रतिभाएं अवसरों की जानकारी और आत्मविश्वास की कमी के कारण पीछे रह जाती हैं।

यदि उन्हें सही समय पर मार्गदर्शन और अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिले, तो वे भी बेहतर मुकाम हासिल कर सकती हैं।