बगहा । गंडक के जल स्तर में वृद्धि और पुल निर्माण विभाग की लापरवाही के कारण प्रखंड के जगीरहा घाट पर स्थित पीपा पुल का एप्रोच पथ नदी में बह गया। जिसके बाद विगत दो दिनों से आवागमन बाधित है। पीपा पुल का एप्रोच पथ बह जाने से क्षेत्र के किसान सहित आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

लोगों को जिला मुख्यालय बेतिया आने-जाने में भारी कठिनाई झेलनी पड़ रही है। नाराज लोगों ने बुधवार को जगीरहा घाट पर बिहार राज्य पुल निर्माण विभाग के अधिकारियों व संवेदक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मरम्मती कार्य में लापरवाही का आरोप लगाया। लोगों ने बड़ी नाव की व्यवस्था कर शीघ्र यातायात बहाल करने की मांग की। महात्मा चौधरी, संतोष राम, चंदेश्वर राम, मुन्ना यादव, बलधर यादव, धुरेंद्र यादव, रविंद्र पांडेय, कोलाइ यादव, हरमुन यादव, उमेश पटेल, बिरनी पटेल, शंकर बैठा, मोतीचंद पटेल, प्रेमशीला देवी, पूनम गुप्ता, अनिता कुशवाहा, अंजनी तिवारी, उमेश यादव आदि ने बताया कि पीपा पुल निर्माण के बाद मरम्मती और देखरेख की जिम्मेदारी विभाग ने संवेदक को सौंपी गई थी। पांच वर्षो के लिए अनुबंध हुआ है। लेकिन, संवेदक की लापरवाही के कारण पुल टूट गया। रबी फसलों की बोवाई के दौरान भी कई दिनों तक आवागमन बाधित था। अब जब फसल पककर तैयार हो गई है, एक बार फिर से वहीं स्थिति उत्पन्न हो गई है। कभी गंडक नदी की दो धाराओं के बीच हजारों एकड़ भूमि बेकार थी, जो पीपा पुल बनने के बाद आबाद हुई। अब किसान भविष्य को लेकर चितित हैं।

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आवागमन बाधित होने के बाद नाव का परिचालन :-

जब-जब पुल टूटता है तो विभागीय नाव से परिचालन शुरू होता है। लोगों की मजबूरी का संवेदक जमकर फायदा उठाता है और मनमाने ढंग से रुपये की वसूली करता है। किसानों के दर्जनों कृषि यंत्र दियारा में ही फंसे हैं। श्रीनगर पंचायत आने-जाने के लिए नदी पार करने की मजबूरी है। प्रखंड मुख्यालय से पंचायत की दूरी महज 4 किलोमीटर है। जबकि उक्त घाट से आवागमन प्रभावित होने के बाद लोगों को पूजहा घाट पार कर बेतिया होते हुए करीब 120 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। नदी की दोनों धाराओं के बीच स्थित श्रीनगर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय जई टोला व नगीना टोला में कार्यरत शिक्षक आवागमन बाधित हो जाने के कारण ड्यूटी नहीं कर पा रहे हैं।

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27 करोड़ की लागत से बना है पीपा पुल :-

उपप्रमुख शीला देवी, बीडीसी प्रदीप चौरसिया व श्रीनगर पंचायत की मुखिया लीलावती देवी ने बताया कि 27 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से पीपा पुल का निर्माण हुआ था। मरम्मती और देखरेख के लिए अतिरिक्त 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष सरकार देती है। लेकिन, संवेदक की लापरवाही के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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Posted By: Jagran