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Bihar News: बगहा में जजों ने संभाली शिक्षक की भूमिका, बच्चों को समझाए अधिकार और सुरक्षा के कानूनी उपाय

Published: Tue, 27 Oct 2026 07:49 PM (IST)

बगहा में 'सुरक्षित बचपन अभियान' के तहत न्यायाधीशों ने स्कूलों में बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा उपायों के ...और पढ़ें

सुरक्षित बचपन अभियान के तहत स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने पहुंचे न्यायिक पदाधिकारी

सुरक्षित बचपन अभियान के तहत स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने पहुंचे न्यायिक पदाधिकारी

HighLights

  1. न्यायाधीशों ने बच्चों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

  2. बाल यौन शोषण, बाल विवाह, बाल श्रम कानून समझाए।

  3. बच्चों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने को प्रेरित किया।

जागरण संवाददाता, बगहा (पश्चिम चंपारण)। अदालत में न्याय की जिम्मेदारी निभाने वाले न्यायाधीश सोमवार को शिक्षक की भूमिका में नजर आए। मौका था सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विद्यालयों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम का। बगहा अनुमंडल के विभिन्न स्कूलों में पहुंचे न्यायिक पदाधिकारियों ने बच्चों को कानून का पाठ पढ़ाया और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

किसी ने बाल यौन शोषण से बचाव की जानकारी दी तो किसी ने बाल अधिकार, बाल विवाह निषेध और बाल श्रम से जुड़े कानूनी प्रावधान समझाए। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बचपन का महत्व बताना और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना था।

Manish kumar

समाज में बेटियों के महत्व और उनके अधिकारों की जानकारी दी गई 

बगहा दो प्रखंड के सहकारी प्रोजेक्ट बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, पटखौली में एडीजे प्रथम मनीष द्विवेदी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए समाज में बेटियों के महत्व और उनके अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बेटियां समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

उन्हें बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। मौके पर बीईओ फूदन राम, प्रधानाध्यापक नागेंद्र प्रसाद सिंह, शिक्षक प्रवीण मिश्रा, कुमार लव, मधुरेंद्र सिंह, मानवेंद्र मिश्रा सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।

वहीं, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश रवि रंजन सिंह ने नरईपुर स्थित नार्थ बिहार शुगर मिल्स उच्च विद्यालय में बच्चों को कानून की जानकारी दी। मांटफोर्ट विद्यालय में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मानवेंद्र मिश्र ने बच्चों को पाक्सो अधिनियम की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि बच्चों को यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और अश्लील सामग्री से जुड़े अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह विशेष कानून बनाया गया है। यह कानून 14 नवंबर 2012 को लागू हुआ था। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चा माना गया है।

यह कानून लड़के और लड़कियों, दोनों को समान रूप से संरक्षण प्रदान करता है। बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराध दंडनीय है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे की सहमति को ऐसे अपराधों में कानूनी बचाव नहीं माना जाता है। इसलिए बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी होना आवश्यक है।

एसीजेएम प्रथम कीर्ति प्रसाद ने पठखौली स्थित राजकीय मध्य विद्यालय तथा एसीजेएम द्वितीय अविनाश कुमार ने रतनमाला स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में बच्चों को पढ़ाया।

एसडीजेएम-सह-सचिव आलोक कुमार चतुर्वेदी ने सनराइज स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम किया। मुंसिफ सुशील कुमार सिंह ने सिटी मान्टेसरी पब्लिक स्कूल, बगहा-1 में बच्चों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।

न्यायिक पदाधिकारी आशीष कुमार पांडेय ने नरईपुर स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, प्रियंका कुमारी ने पठखौली मलकौली स्थित राजकीय मध्य विद्यालय और अजय कुमार ने बगहा एक स्थित राजकीय कन्या मध्य विद्यालय में बच्चों को जागरूक किया।

तनिक शमीम ने पारस नगर स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, राहुल राज ने राजकीय उर्दू प्राथमिक विद्यालय अंजुमन तथा हीना नाज ने प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय, बगहा एक में विद्यार्थियों को कानून की जानकारी दी।