West Champaran : सरकारी स्कूलों में बदली पढ़ाई की तस्वीर, मॉडल बनाकर बच्चे सीख रहे विज्ञान, NEET-IIT की तैयारी
पश्चिम चंपारण के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदल रहा है, जहां बच्चे अब किताबों से आगे बढ़कर विज्ञान ...और पढ़ें
HighLights
सरकारी स्कूलों में अब मॉडल और प्रयोग से पढ़ाई।
22 मॉडल स्कूलों में नीट-आईआईटी की विशेष तैयारी।
विद्या साथी ऐप से तकनीक आधारित शिक्षा दी जा रही।
संदेश तिवारी, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। कभी जिन हाथों में सिर्फ किताब और कापी हुआ करती थी, अब उन्हीं हाथों में विज्ञान के मॉडल, पर्यावरण की कलाकृतियां और गणित को समझाने वाले प्रयोग नजर आ रहे हैं। सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए पढ़ाई का यह बदलता अंदाज उनकी आंखों में सपने और सीखने की नई ललक पैदा कर रहा है।
जिले के सभी 18 प्रखंडों में संचालित 22 सरस्वती विद्या निकेतन यानी माडल स्कूलों में अब बच्चे किताबों से आगे बढ़कर प्रोजेक्ट, गतिविधि और प्रयोग के माध्यम से पढ़ रहे हैं। प्रत्येक माडल स्कूल में 40 छात्रों को नीट और आइआइटी के लिए तैयार किया जा रहा है।
इन विद्यालयों में करीब 880 बच्चों को तकनीक आधारित शिक्षा दी जा रही है। नीट-आइआइटी की तैयारी के लिए विद्या साथी एप और बिहार स्कूल लाइव क्लास से शिक्षक मार्गदर्शन कर रहे हैं।
चनपटिया के राजकीयकृत युगल प्रसाद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भैसही के छात्र इस बदलाव के साथ कदमताल कर रहे है। यहां नौवीं कक्षा के 40 बच्चों के लिए विशेष माडल सेक्शन तैयार किया गया है, जहां पढ़ाई को रोचक और व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

हर सप्ताह बच्चों के हाथों आकार ले रहा नया सपना
मॉडल सेक्शन में हर सप्ताह बच्चे अपनी कल्पना को प्रोजेक्ट का रूप दे रहे हैं। कोई विज्ञान का मॉडल बना रहा है तो कोई पर्यावरण और गणित से जुड़ी कलाकृति तैयार कर रहा है।
शिक्षक के मार्गदर्शन में बच्चे उपलब्ध सामग्री से अपनी सोच को आकार देते हैं। विद्यालय प्रशासन की ओर से प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। बच्चों के बनाए मॉडल और शैक्षणिक सामग्री ने कक्षा को भी एक छोटी प्रयोगशाला जैसा रूप दे दिया है।

खेल-खेल में कठिन विषय हो रहे आसान
प्रधानाध्यापक रवि रंजन कुमार के नेतृत्व में वर्ग शिक्षक पांडेय धर्मेंद्र शर्मा सहित अन्य शिक्षक गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दे रहे हैं।
कंप्यूटर की जानकारी देने के साथ बच्चों को खेल और गतिविधियों के जरिए विषय समझाए जा रहे हैं। इससे जिन अध्यायों को बच्चे पहले कठिन समझते थे, अब उन्हें सीखने में आनंद आने लगा है।
हर सप्ताह परखी जा रही सीखने की क्षमता
बच्चों की प्रगति जानने के लिए साप्ताहिक मूल्यांकन किया जाता है। परीक्षा से कमजोर विषयों और बच्चों की कमियों की पहचान की जाती है। इसके बाद उन्हें जरूरत के अनुसार अतिरिक्त मार्गदर्शन दिया जाता है, ताकि कोई बच्चा पढ़ाई में पीछे न रह जाए। माडल स्कूल में बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं दिया जा रहा, बल्कि उन्हें स्वच्छता, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा जा रहा है।
माडल स्कूलों का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई को आधुनिक, प्रयोगात्मक और तकनीक आधारित बनाना है। डिजिटल माध्यमों से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सामग्री और विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- राजन कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी, बेतिया
