Bihar News : बाढ़ ने छीना अपना घर तो रिश्तेदारों ने खोले दरवाजे, 128 परिवारों को मिला अपनों का आसरा
पश्चिम चंपारण में नेपाल से आई बाढ़ और गंडक नदी के कटाव ने सिसवा मंगलपुर पंचायत में 128 परिवारों को ...और पढ़ें
सुनील आनंद, बेतिया (पश्चिम चंपारण) । बाढ़ सिर्फ घरों की दीवारें नहीं बहाती, वह लोगों की वर्षों की जमा पूंजी, उम्मीद और अपने घर में सुरक्षित रहने का भरोसा भी छीन लेती है। नेपाल से आई बाढ़ के कारण गंडक नदी में आई उफान ने योगापट्टी प्रखंड के सिसवा मंगलपुर पंचायत के लोगों के सामने भी ऐसी ही मुश्किल खड़ी कर दी है।
बाढ़ से पंचायत के मंगलपुर, सिसवा पूर्व टोला, खाप टोला और मनधातापुर प्रभावित है। घरों में पानी घुसने और आवागमन की परेशानी बढ़ने के बाद 128 परिवारों के करीब 2500 लोगों ने अपने रिश्तेदारों के घरों में शरण ली है।

घरों के दरवाजे पर ताला लटका
कल तक जिन घरों में चूल्हा जलता था और बच्चे आंगन में खेलते थे, आज उन्हीं घरों के दरवाजे पर ताला लटका है। बाढ़ पीड़ितों के लिए फिलहाल रिश्तेदारों के घर ही राहत शिविर बन गए हैं। सिसवा के गणेश शर्मा ने बताया कि पिछले एक दशक से बरसात के दिनों में यहां के लोगों की जिंदगी ऐसे ही कटती है।
बाढ़ की विभीषिका के बीच प्रशासनिक मदद का इंतजार करने के बजाय कई परिवार रिश्तेदारों के भरोसे सुरक्षित स्थानों की ओर निकल जाते हैं। किसी ने बच्चों और बुजुर्गों को पहले भेजा तो किसी ने जरूरी सामान समेटकर पूरा परिवार ही रिश्तेदारों के घर पहुंचा दिया।
रिश्तेदारों ने भी संकट की इस घड़ी में अपने घरों के दरवाजे खोल दिए हैं। किसी के घर एक परिवार पहुंचा है तो कहीं दो-दो परिवारों ने शरण ले रखी है।रिश्तेदारों के यहां पहुंचे लोगों के सामने भोजन, रहने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पानी घटने के बाद ही वे अपने घर लौट सकेंगे।

बाढ़ ने बदल दी गांवों की तस्वीर
सिसवा मंगलपुर पंचायत के प्रभावित गांवों में बाढ़ ने सामान्य जिंदगी की रफ्तार रोक दी है। जिन गलियों में रोजाना लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब पानी और कीचड़ का कब्जा है। खेतों में लगी फसलें भी प्रभावित हुई हैं।
वहीं सिसवा मंगलपुर पंचायत में बाढ़ का असर खेती पर भी पड़ा है। पंचायत के मंगलपुर, सिसवा पूर्व टोला, खाप टोला और मनधातापुर क्षेत्र में करीब 500 एकड़ खेत में लगा धान और गन्ने की फसल बाढ़ के पानी से प्रभावित हुई है।
खेतों में पानी जमा होने से किसानों को फसल खराब होने की चिंता सताने लगी है। किसान प्यारेलाल पटेल ने बताया कि बाढ़ के कारण किसानों के सामने आर्थिक नुकसान का संकट खड़ा हो गया है। पानी उतरने के बाद ही फसल को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन हो सकेगा।

25 लोगों का छीन गया आशियाना , नए ठिकाने की तलाश
इस वर्ष गंडक नदी के कटान से सिसवा मंगलपुर पंचायत के सिसवा कुट्टी गांव के 25 घर नदी में विलीन हो चुके हैं। कटान की चपेट में आए परिवारों के सामने अब सिर छिपाने के लिए नए ठिकाने की तलाश की मजबूरी है।
सिसवा मंगलपुर पंचायत के वार्ड संख्या नौ निवासी बुधु पटेल, मुस्मात अनिता, मुख्तार मियां, राधामोहन पटेल, बलिस्टर पटेल, हीरालाल पटेल, सुरेश पटेल, मुट्टू मियां, बबुना मियां, नंदलाल मुखिया, कृष्णा पटेल, आदि का घर कट चुका है। अभी भी तीन जगहों पर कटान हो रही है।
वर्षों की मेहनत से बनाया घर देखते-देखते नदी में समा जाने से प्रभावित परिवारों के सामने रहने और परिवार को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीण लगातार कटाव को रोकने के लिए ठोस इंतजाम की मांग कर रहे हैं।
