बिहार में नदी से मिल रहे शव, दुर्गंध से लोग परेशान, बाढ़ के पानी संग आई मछलियों ने बढ़ाई चिंता
नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ के कारण गंडक नदी में बहकर आ रहे शवों से पश्चिम चंपारण में दुर्गंध फैल रही ...और पढ़ें

नदी में दिख रहा शव व पकड़ी गई मछली।
HighLights
गंडक नदी में नेपाल बाढ़ से बहकर आ रहे शव।
अस्पताल में शवों की अधिकता से दुर्गंध, क्षमता कम।
बाढ़ के साथ आई अज्ञात मछलियों से स्वास्थ्य चिंता।
संवाद सूत्र, वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण)। नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी की विनाशकारी बाढ़ ने गंडक नदी के किनारे रहने वाले लोगों के सामने त्रासदी की ऐसी तस्वीर खड़ी कर दी है, जिसे देख और महसूस कर हर कोई विचलित है। सैलाब के साथ बहकर आए शव अब अस्पतालों में पहुंच रहे हैं और उनकी बढ़ती संख्या से शवों को रखने की व्यवस्था चरमरा गई है।
पृथ्वीचंद अस्पताल के आसपास शवों से उठती दुर्गंध ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसी बीच बाढ़ के पानी के साथ बिहार पहुंचे अज्ञात प्रकार की मछलियों ने भी नई चिंता पैदा कर दी है। प्रशासन ने लोगों से ऐसी मछलियों का सेवन नहीं करने की अपील की है।
सात शवों की क्षमता, संख्या उससे अधिक
परासी स्थित पृथ्वीचंद अस्पताल में शवों को रखने की क्षमता सीमित है। अस्पताल के शव गृह में महज सात शव रखने की व्यवस्था है, जबकि नेपाल में आई त्रासदी के बाद गंडक नदी से बरामद शवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे अस्पताल प्रशासन के सामने शवों के सुरक्षित रखरखाव की चुनौती पैदा हो गई है।
दुर्गंध से जीना हुआ मुश्किल
पृथ्वीचंद अस्पताल विकास समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद चौधरी ने बताया कि कुछ शव लंबे समय से रखे होने के कारण सड़कर दुर्गंधित हो गए हैं। सभी शवों को पैक करके रखा गया है, इसके बावजूद दुर्गंध को पूरी तरह नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है। अस्पताल परिसर के साथ आसपास की बस्ती में भी दुर्गंध फैल रही है।
मरीज और स्वास्थ्यकर्मी भी परेशान
दुर्गंध के कारण अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी परेशानी हो रही है। अस्पताल से सटी बस्ती के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन से शवों को रखने के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों को आशंका है कि लंबे समय तक शवों के पड़े रहने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
118 शव और 50 मानव अंग बरामद
नेपाल की बाढ़ के बाद गंडक क्षेत्र से अब तक 118 शव और 50 मानव शरीर के अंग बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से कुछ शवों को रूपनदही, कपिलवस्तु, पाल्पा सहित नेपाल के अन्य जिला अस्पतालों में भेजा गया है। नदी से लगातार शव और मानव अंग मिलने से गंडक किनारे बसे इलाकों में भी भय और चिंता का माहौल है।
बाढ़ के साथ आईं अज्ञात मछलियां
एक ओर नदी से शव मिलने की त्रासदी लोगों को विचलित कर रही है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ के पानी के साथ बड़ी संख्या में मछलियां भी गंडक क्षेत्र में पहुंच रही हैं। इनमें कुछ मछलियां स्थानीय लोगों के लिए अपरिचित और असामान्य बताई जा रही हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
बिना पहचान मछली खाने से बचें
एसडीएम चांदनी कुमारी ने लोगों से अज्ञात मछलियों का सेवन नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान तालाब, नदी और अन्य जलाशयों से मछलियां बहकर दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच सकती हैं। लंबे समय तक बाढ़ के पानी में रहने के कारण इनके दूषित होने की आशंका रहती है।
खरीद-बिक्री से भी बचने की सलाह
एसडीएम ने कहा कि बिना पहचान और संबंधित विभाग की पुष्टि के किसी अपरिचित मछली को खाने योग्य नहीं माना जाए। बाढ़ के पानी से पकड़ी गई अज्ञात मछलियों को खरीदने-बेचने और भोजन में इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। प्रशासन ने लोगों से ऐसी मछलियां मिलने पर इसकी सूचना जिला मत्स्य पदाधिकारी या स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की है।
तबीयत बिगड़े तो तुरंत लें सलाह
प्रशासन ने यह भी कहा है कि अज्ञात मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर या सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या हो तो तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। लोगों को किसी तरह का जोखिम नहीं उठाने की सलाह दी गई है।
पहले दिन पकड़ी गई थीं डेढ़ क्विंटल मछलियां
नेपाल में आई त्रासदी के बाद बड़ी संख्या में मछलियां गंडक नदी में बहकर आने की सूचना है। पहले दिन ही करीब डेढ़ क्विंटल मछलियां पकड़ी गई थीं। गंडक किनारे रहने वाले लोग बड़ी संख्या में इन मछलियों को पकड़कर घर ले जा रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की अपील का उद्देश्य लोगों को संभावित स्वास्थ्य जोखिम से बचाना है।
त्रासदी के बीच दोहरी चिंता
गंडक किनारे बसे लोगों के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ सैलाब के साथ बहकर आए शवों की संख्या बढ़ने से अस्पतालों और प्रशासन के सामने उनके सुरक्षित प्रबंधन की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ के पानी के साथ आई अज्ञात मछलियों को लेकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। नदी का यह बदला हुआ रूप नेपाल की त्रासदी के गहरे और दर्दनाक असर को सामने ला रहा है।

