बिहार में अब रजिस्ट्री के साथ हाथों-हाथ रंगीन दस्तावेज, पेपरलेस व्यवस्था पर बढ़ा भरोसा
बिहार में 3 अगस्त से शुरू हुई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था में अब लोगों का विश्वास बढ़ रहा है, जिससे क्रेताओं ...और पढ़ें

क्रेता को रंगीन दस्तावेज देते जिला अवर निबंधन पदाधिकारी। सौ. निबंधन विभाग
जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। निबंधन एवं मद्य निषेध विभाग की ओर से जारी नए निर्देश के आलोक में पेपरलेस रजिस्ट्री की शुरुआत तीन अगस्त से हुई है, लेकिन 14 दिनों में मात्र पांच दस्तावेजों का ही निबंधन कराया गया था। ऐसा इसलिए कि नई व्यवस्था के शुरू होने को लेकर लोगों में जानकारी का अभाव था।
जैसे -जैसे उनमें जागरूकता बढ़ रही है, वैसे -वैसे पेपरलेस रजिस्ट्री कराने में उनका विश्वास बढ़ने लगा है। एही कारण है कि केवल बुधवार को बेतिया अवर निबंधन कार्यालय में तीन दस्तावेजों की रजिस्ट्री हुई।
सभी क्रेताओं को निबंधन के साथ रंगीन दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिया गया। रंगीन दस्तावेज लेने से ही उनमें हर्ष की स्थिति रही। क्रेताओं के अनुसार पूर्व में निबंधन कराने के करीब एक सप्ताह के बाद जमीन का दस्तावेज मिलता था, उसके लिए उन्हें पुन: निबंधन कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ती थी।
पेपरलेस निबंधन सुरक्षित व बेहतर
जिला अवर निबंधन पदाधिकारी गिरिश चंद ने बताया कि पेपरलेस निबंधन व्यवस्था सुरक्षित और बेहतर है। इसमें क्रेता एवं विक्रेता दोनों को सुविधा मिलेगी और गलत कार्यों पर रोक लगेगी। निबंधन के बाद जमीन के डीड की प्रति कार्यालय से क्रेता को उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि पुरानी व्यवस्था में जहां प्रतिदिन औसतन 100 से अधिक रजिस्ट्री हो रही थी, नई व्यवस्था में काफी गिरावट आई है। अब तक कुल 8 दस्तावेजों का निबंधन हो सका है।
ओटीपी हस्ताक्षर को लेकर संशय
दस्तावेज नवीस संघ के अध्यक्ष संजय कुमार वर्मा ने कहा कि संघ हड़ताल पर नहीं है। बताया कि नए नियम को लेकर क्रेता एवं विक्रेताओं में संशय की स्थिति है। पेपरलेस निबंधन में क्रेता एवं विक्रेता के हस्ताक्षर की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ओटीपी का उपयोग किया जाता है। कई क्रेता और विक्रेता ओटीपी देने में असहजता जता रहे हैं, जिससे निबंधन कार्य प्रभावित हो रहा है।
