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दहेज और नाच-गान कराने वाले का मौलवी नहीं पढ़ाएंगे निकाह, बिहार के मुस्लिम समाज के फैसले की सराहना

By Prabhat Mishra Edited By: Ajit kumar
Published: Sun, 12 Apr 2026 04:53 PM (GMT+05:30)

Nikah Rules Bihar: पश्चिम चंपारण के गौनाहा प्रखंड में मुस्लिम समाज ने शादी-विवाह में डीजे, नाच-गान और आर्केस्ट्रा पर प्रतिबंध ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई की मदद से तैयार की गई है।

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संवाद सूत्र, गौनाहा (पश्चिम चंपारण)। Muslim Society Reform: पश्चिम चंपारण के गौनाहा प्रखंड के डरौल पंचायत में मुस्लिम समाज ने सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए शादी-विवाह में डीजे, नाच-गान और आर्केस्ट्रा पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस फैसले को समाज के भीतर सराहना मिल रही है।

बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय

यह निर्णय 10 अप्रैल को ईदगाह मस्जिद परिसर में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में दहेज प्रथा और अनावश्यक रस्मों-रिवाजों को खत्म करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

सादगीपूर्ण निकाह को बढ़ावा

समाज के लोगों ने सादगीपूर्ण निकाह को बढ़ावा देने पर जोर दिया। तय किया गया कि शादी में फिजूलखर्ची और दिखावे से बचते हुए सरल तरीके से निकाह किया जाएगा।

उल्लंघन पर सामाजिक बहिष्कार

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि किसी शादी में डीजे, नाच-गान या आर्केस्ट्रा का उपयोग किया गया तो संबंधित परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। साथ ही ऐसे आयोजनों में कोई भी मौलवी निकाह नहीं पढ़ाएंगे।

नियम तोड़ने पर जुर्माना

निर्णय के अनुसार यदि कोई इमाम इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं बाहरी मौलवी द्वारा निकाह पढ़ाने पर दस हजार रुपये का दंड तय किया गया है।

निगरानी के लिए कमिटी का गठन

फैसले को प्रभावी बनाने के लिए 11 मस्जिदों के प्रत्येक हल्का से 15-15 युवाओं की टीम गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो इन नियमों के पालन की निगरानी करेगी।

समाज सुधार की दिशा में पहल

बैठक में मौजूद मौलाना शहाबुद्दीन अंसारी सहित अन्य वक्ताओं ने इस पहल को समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि नाच-गान और आर्केस्ट्रा से सामाजिक वातावरण प्रभावित होता है और बच्चों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है।

फिजूलखर्ची और दहेज पर अंकुश

वक्ताओं ने कहा कि इस निर्णय से न केवल फिजूलखर्ची पर रोक लगेगी, बल्कि दहेज जैसी कुप्रथा को भी खत्म करने में मदद मिलेगी। यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।