बिहार के छात्र ने कबाड़ से बनाया मिनी ट्रैक्टर, चंपारण के 19 साल के ITI छात्र ने किया कमाल
Bihar ITI Student Innovation:नरकटियागंज के 19 वर्षीय ऋषिपाल शर्मा ने बिना इंजीनियरिंग डिग्री के उपलब्ध संसाधनों से मिनी ट्रैक्टर बनाया ...और पढ़ें

कबाड़ से तैयार ट्रैक्टर के साथ ऋषिपाल।
HighLights
19 वर्षीय ऋषिपाल शर्मा ने उपलब्ध संसाधनों से मिनी ट्रैक्टर बनाया।
80 हजार रुपये की लागत से तीन महीने में तैयार हुआ ट्रैक्टर।
यह ट्रैक्टर खेत की जुताई और सामान ढुलाई में उपयोगी है।
राहुल वर्मा, नरकटियागंज (पश्चिम चंपारण)। Bihar ITI Student Innovation: न इंजीनियरिंग की डिग्री और न ही आधुनिक मशीनों से सुसज्जित कोई वर्कशाप।
गांव में उपलब्ध संसाधन, तकनीकी सोच और तीन महीने की मेहनत के दम पर नरकटियागंज के गौरीपुर मंझरिया गांव के 19 वर्षीय ऋषिपाल शर्मा ने मिनी ट्रैक्टर तैयार कर दिया।
एक लीटर डीजल में 25 किलोमीटर
ट्रैक्टर तैयार होने के बाद खुद इसे चलाकर ट्रायल लिया। ऋषिपाल बताते हैं कि ट्रायल के दौरान एक लीटर डीजल में करीब 25 किलोमीटर का माइलेज मिला। फिलहाल इसका उपयोग खेत में जुताई के साथ ट्राली जोड़कर सामान की ढुलाई में किया जा रहा है।
बचपन से किसानी से लगाव
ऋषिपाल किसान परिवार से हैं। उनके पिता गोपालजी शर्मा किसानी करते हैं। इसी माहौल में खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों को लेकर उसकी रुचि बढ़ी। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद तकनीकी जानकारी हासिल करने के लिए उन्होंने आइटीआइ की पढ़ाई की।
पहले बना चुके मिनी राइस मिल
इसके बाद अपने स्तर पर उपयोगी उपकरण तैयार करने का प्रयोग शुरू किया। वर्ष 2024 में करीब 1900 रुपये की लागत से मिनी राइस मिल तैयार की। यह प्रयोग सफल रहा तो उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने मिनी ट्रैक्टर बनाने की योजना बनाई।
खुद तैयार किया चेचिस
ऋषिपाल ने मिनी ट्रैक्टर तैयार करने में पुराने और उपलब्ध कल-पुर्जों का इस्तेमाल किया। इसमें पहिया, नट-बोल्ट, सीट, एक्सलेटर पैडल, क्लच और ब्रेक पैडल समेत कई हिस्से शामिल हैं।
ट्रैक्टर का गेयर बाक्स उन्होंने पटना से नया खरीदा। इसके बाद खुद बेल्डिंग कर चेचिस और बुनियादी ढांचा तैयार किया। अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर ड्राइव वाली मशीन मिनी ट्रैक्टर का स्वरूप दिया।
तीन माह की मेहनत
पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 80 हजार रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि मशीन तैयार करने के दौरान उन्हें डिजाइन में एक बार बदलाव करना पड़ा।
इसके बाद दोबारा काम शुरू कर इसे अंतिम रूप दिया गया। करीब तीन महीने की मेहनत के बाद जब मशीन तैयार हुई तो ऋषिपाल ने खुद इसे चलाकर ट्रायल लिया।
जुताई के साथ ढुलाई का काम
मिनी ट्रैक्टर का इस्तेमाल फिलहाल खेत की जुताई में हो रही है। ऋषिपाल का कहना है कि इससे ट्रॉली जोड़कर सामान की ढुलाई भी की जा सकती है। अभी इसमें दूसरे कृषि उपकरण चलाने की सुविधा विकसित नहीं की गई है।
उनका कहना है कि यदि उन्हें बेहतर संसाधन और अवसर मिले तो इससे भी उपयोगी और बेहतर उपकरण तैयार करने की कोशिश करेंगे।
