बिहार के फुटवियर उद्योग को लगेंगे पंख, अंतरराष्ट्रीय फेयर में सरकार ने दिया निवेश का न्योता
Bihar Footwear Industry: बिहार सरकार ने नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय फुटवियर फेयर में राज्य में निवेश के लिए उद्यमियों को ...और पढ़ें

बिहार सरकार अपनी नई नीति के दम पर फुटवियर उद्योग को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रही है। फाइल फोटो

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जागरण संवाददाता, सिकटा (पश्चिम चंपारण)। Bihar Footwear Industry: नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फुटवियर फेयर में बिहार सरकार ने अपना विशेष स्टाल लगाकर देश-विदेश के प्रमुख उद्यमियों को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने निवेशकों को संबोधित करते हुए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
फेयर के दौरान उद्योग सचिव कुंदन कुमार ने राज्य की प्रगतिशील फुटवियर नीति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देकर निवेशकों को आकर्षित किया।
उद्यमियों को विशेष सुविधाएं
हाजीपुर स्थित देश की प्रतिष्ठित निर्यात इकाई कॉम्पिटेंस एक्सपोर्ट्स के प्रबंध निदेशक धनेश प्रसाद ने बताया कि सरकार निवेशकों को एक रुपये में जमीन और बेहद कम किराये पर शेड दे रही है।
इसके साथ ही औद्योगिक ऋण के ब्याज पर सरकारी सहायता व दो रुपये प्रति यूनिट बिजली छूट जैसी राहत दी जा रही है। इन नीतिगत प्रोत्साहनों और रोजगार अनुदान से राज्य में फुटवियर उत्पादन की लागत 15 से 20 प्रतिशत तक कम होगी।
प्रमुख जिलों में विस्तार
वर्तमान में वैशाली का हाजीपुर फुटवियर निर्यात का सबसे बड़ा क्लस्टर बनकर उभरा है, जबकि मुजफ्फरपुर के महवल व बेला में मेगा लेदर पार्क तेजी से विकसित हो रहा है।
इसके अतिरिक्त पटना के दीदारगंज, मोकामा, पश्चिम चंपारण के स्टार्टअप जोन समेत गया व भागलपुर में फुटवियर निर्माण का मजबूत नेटवर्क मौजूद है। मुजफ्फरपुर के मेगा पार्क के जरिए 20 हजार से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का लक्ष्य तय किया गया है।
सालाना 1500 करोड़ का कारोबार
देश के कुल कच्चे चमड़े का करीब 8 से 10 प्रतिशत उत्पादन अकेले बिहार में होता है, जिसका संगठित व असंगठित सालाना कारोबार 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये आंका गया है।
नई टेक्सटाइल एवं लेदर पॉलिसी के तहत राज्य ने अब तक 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए हैं। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य कच्चे माल के स्थान पर विश्वस्तरीय तैयार जूते बनाकर सीधे वैश्विक बाजारों में निर्यात करना है।
हाजीपुर मॉडल प्रेरक
उद्यमी धनेश प्रसाद ने निवेशकों के साथ अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाजीपुर में निर्मित ‘बिहार मेड’ जूते आज कई देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। उन्होंने अन्य उद्योगपतियों को जमीनी हकीकत और औद्योगिक माहौल देखने के लिए बिहार आने का आमंत्रण दिया।
लहर फुटवियर सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय ब्रांड्स द्वारा 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर करने से राज्य का औद्योगिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।
