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प्रशासन फेल तो भगवान की शरण! पश्चिम चंपारण में गंडक के कटाव से बचने के लिए बगहा में अष्टयाम महायज्ञ

Published: Mon, 06 Jul 2026 03:22 PM (IST)

Gandak River Disaster: पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक नदी के संभावित कटाव से बचाव के लिए ग्रामीणों ने 48 ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, बगहा (पश्चिम चंपारण)। Gandak River Erosion: आपदा के समय जब सरकारी सिस्टम की रफ्तार धीमी पड़ने लगती है, तो आम जनमानस आस्था की शरण में जाने को मजबूर हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में देखने को मिल रहा है।

जिले के मधुबनी प्रखंड के सिसई पंचायत अंतर्गत सोहगीबरवा गांव में गंडक नदी के संभावित और विनाशकारी कटाव से बचाव के लिए ग्रामीणों ने भगवान का सहारा लिया है।

क्षेत्र की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना को लेकर ग्रामीणों द्वारा आयोजित 48 घंटे का अखंड अष्टयाम महायज्ञ पूरी श्रद्धा और भक्ति के माहौल में सम्पन्न हो गया।

दो दिनों तक चले इस हरिनाम संकीर्तन में बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान से अपने आशियाने और खेतों को बचाने की गुहार लगाई।

पिछले साल गंडक ने मचाई थी तबाही

महायज्ञ के समापन पर स्थानीय ग्रामीण अनिल यादव, सुबास यादव, मुन्ना कुशवाहा, जयप्रकाश यादव तथा स्थानीय पंचायत के मुखिया ने पिछले वर्ष की प्रशासनिक उदासीनता और प्राकृतिक आपदा का दर्द साझा किया।

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष गंडक नदी के भीषण कटाव ने घोड़हवा, नराहवा, सोहगीबरवा समेत आसपास के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा के कारण किसानों की करीब एक हजार एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि नदी की तेज धारा में विलीन हो गई थी।

यही नहीं, लगभग 150 हंसते-खेलते घर भी गंडक की भेंट चढ़ गए थे, जिसके बाद कई परिवार रातों-रात बेघर हो गए और उन्हें बांध व सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी।

सताने लगा कटाव का डर

ग्रामीणों का कहना है कि मानसून की दस्तक और नेपाल के तराई क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है।

नदी में उफान आने के साथ ही गांव पर कटाव का खतरा मंडराने लगा है। पिछले साल की खौफनाक यादों और इस वर्ष भी प्रशासनिक स्तर पर ठोस इंतजाम न दिखने के कारण ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से अखंड अष्टयाम का संकल्प लिया।

ग्रामीणों को भरोसा है कि जहां सरकारी तंत्र नाकाम साबित हो रहा है, वहां ईश्वर की लाठी और प्रार्थना ही उनके गांव, किसानों और फसलों की रक्षा करेगी।

सुरक्षा कार्य शुरू करने की मांग

यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद श्रद्धालुओं ने पूरे क्षेत्र में शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके साथ ही ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से पुरजोर मांग की है कि संभावित कटाव वाले संवेदनशील इलाकों में अविलंब और समय रहते वैज्ञानिक तरीके से कटावरोधी कार्य शुरू कराया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बोल्डर क्रेटिंग या जियो बैग डालने का काम नहीं किया गया, तो पिछले वर्ष जैसी तबाही की पुनरावृत्ति को रोकना असंभव हो जाएगा और सैकड़ों गरीब परिवारों की जान-माल व बची-खुची खेती पूरी तरह तबाह हो जाएगी।