उपेक्षा का शिकार 40 लाख में बना बगहा का रैन बसेरा, देखरेख के अभाव में खंडहर बनने की कगार पर
बगहा में 40 लाख की लागत से बना रैन बसेरा देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो रहा है। 2012-13 में नगर विकास विभाग ने इसे बेसहारा लोगों के लिए बनवाया था, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इसकी हालत खस्ता हो गई है। नगर परिषद अब इसकी मरम्मत के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

बगहा का रैन बसेरा
संवाद सहयोगी, बगहा। नगर क्षेत्र के शास्त्री नगर मुख्य चौक पर लगभग 40 लाख रुपये की लागत से निर्मित रैन बसेरा आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। विभागीय देखरेख और रख रखाव के अभाव में यह भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता दिखाई दे रहा है।
जानकारी के अनुसार नगर विकास विभाग द्वारा वर्ष 2012-13 में असहाय, गरीब, राहगीर तथा यात्रियों के आश्रय हेतु इस रैन बसेरा का निर्माण कराया गया था। शुरुआत में इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया था, जिनमें साफ-सुथरे कमरे, शुद्ध पेयजल, शौचालय, बिजली की व्यवस्था तथा रोशनी के लिए पर्याप्त लाइटें शामिल थीं।
इसके उद्घाटन के समय नगर परिषद को उम्मीद थी कि इससे न केवल जरूरतमंदों को सुविधा मिलेगी, बल्कि परिषद को कुछ राजस्व की भी प्राप्ति होगी। लेकिन वर्षों बीतने के साथ प्रशासनिक उपेक्षा और मरम्मत के अभाव में रैन बसेरा की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
दीवार भी क्षतिग्रस्त, देखभाल नहीं
भवन की दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही है, बिजली व पानी की व्यवस्था ठप हो चुकी है और पूरा परिसर वीरान व जर्जर दिखता है। गौरतलब है कि बीच-बीच में इस रैन बसेरा का उपयोग बाढ़ आपदा प्रबंधन टीम के अस्थायी आवास के रूप में भी किया गया था।
कोविड-19 संक्रमण के दौरान भी इसे जरूरत के हिसाब से उपयोग में लाया गया। कई बार गरीब और असहाय यात्रियों को भी यहां ठहराया गया। इसके बावजूद समय रहते देखभाल न होने के कारण भवन अब लगभग बेकार साबित होने लगा है।
बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाने की तैयारी
जब इस संबंध में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सरोज कुमार बैठा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि रैन बसेरा के पुन : विकास और मरम्मत के लिए नप की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। बैठक में प्रस्ताव लाकर इसके सुदृढ़ीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय नगर के लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर इसकी देखरेख और मरम्मत की जाती रहती, तो आज यह रैन बसेरा खंडहर की स्थिति में नहीं पहुंचता। जरूरतमंदों की सुविधा के लिए बने इस भवन की दुर्दशा पर सभी को चिंता व्यक्त करनी चाहिए और प्रशासन को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।

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