बगहा में उम्रकैद सुनते ही कोर्ट में फूट-फूटकर रोने लगा दोषी, विजय हत्याकांड में मिली सजा
बगहा के रामनगर में विजय सहनी हत्याकांड में मुख्य आरोपी अशोक यादव को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ ने ...और पढ़ें

पश्चिम चंपारण के बगहा में पुलिस की गिरफ्त में दोषी व अन्य।
HighLights
विजय सहनी हत्याकांड में मुख्य आरोपी अशोक यादव को उम्रकैद।
अदालत ने अशोक यादव पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
दोषी अशोक यादव अदालत में खुद को निर्दोष बताता रहा।
विनोद राव, बगहा (पश्चिम चंपारण)। रामनगर थाना कांड संख्या 189/2022 से जुड़े विजय सहनी हत्याकांड में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने शुक्रवार को मुख्य आरोपित अशोक यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई।
सजा सुनाए जाने के दौरान अभियुक्त अदालत में रोने लगा और खुद को निर्दोष बताते हुए न्यायालय से गुहार लगाता रहा। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों की कड़ियों के आधार पर उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
उम्रकैद के साथ एक लाख का अर्थदंड
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और धारा 120(बी) के तहत अशोक यादव को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा दी। वहीं, धारा 201 के तहत सात वर्ष के कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। न्यायालय ने न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित करने का आदेश दिया। अर्थदंड की राशि जमा होने पर उसे मृतक के आश्रितों को देने का निर्देश दिया गया।
पहले पांच अभियुक्तों को हो चुकी सजा
इस मामले में पांच अन्य अभियुक्तों को पांच सितंबर को इसी अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इनमें मृतक विजय सहनी की सगी बहन गीता देवी भी शामिल है। इसके अलावा तेतर राम उर्फ साधु, झी मुसहर, महफूज अंसारी और राजकिशोर महतो को भी सजा दी जा चुकी है।
अभियोजन ने मांगी कठोर सजा
अपर लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने अभियोजन की ओर से कठोर सजा देने की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार सिंह ने अभियुक्त की पारिवारिक स्थिति का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की मांग की। बचाव पक्ष ने कहा कि अशोक यादव अपने परिवार का मुख्य कर्ताधर्ता है और उसके जेल में रहने से परिवार के भरण-पोषण पर असर पड़ रहा है।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से जुड़ी कड़ियां
अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन की ओर से प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ती हैं और आरोपितों की संलिप्तता स्पष्ट होती है। घटना एक मई 2022 की है। आरोपित अशोक यादव ने पोखरा विवाद सुलझाने के नाम पर विजय सहनी को फोन कर बुलाया था। तेतर राम उर्फ साधु के मोबाइल सीडीआर के विश्लेषण से भी इसकी पुष्टि हुई।
फोन पर हुई लगातार बातचीत
साक्ष्यों के अनुसार, विजय सहनी अपनी पत्नी को पूरी बात बताकर मोटरसाइकिल से घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। घटना के दिन विजय सहनी और तेतर राम के बीच लगातार मोबाइल पर बातचीत हुई। अन्य आरोपितों के साथ भी तेतर राम की बातचीत के प्रमाण सीडीआर में मिले। घटना के समय कई आरोपितों के मोबाइल की लोकेशन गोबर्धना क्षेत्र में पाई गई।
गला दबाकर हत्या, जंगल में दफनाया शव
अदालत ने माना कि विजय सहनी की मौत गला दबाने से दम घुटने के कारण हुई। हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के लिए शव को गोबर्धना जंगल में नदी किनारे गहरा गड्ढा खोदकर दफना दिया गया था। मोटरसाइकिल को भी घास-फूस से ढककर छिपाया गया।
निशानदेही पर बरामद हुआ शव
महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर विजय सहनी का शव और मोटरसाइकिल बरामद हुई थी। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और घटनाक्रम की कड़ियों के आधार पर अशोक यादव को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
