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मोबाइल की रोशनी में कट रहे टिकट, टॉर्च के सहारे ट्रेन पकड़ने को मजबूर यात्री

Published: Tue, 11 Aug 2026 08:55 PM (IST)

बिहार-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित अवसानी हॉल्ट पर शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है, जिससे यात्रियों को मोबाइल की ...और पढ़ें

अवसानी हॉल्ट पर अंधेरे में यात्रा: यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल, मोबाइल की रोशनी बनी सहारा (AI Generated Image)

अवसानी हॉल्ट पर अंधेरे में यात्रा: यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल, मोबाइल की रोशनी बनी सहारा (AI Generated Image)

HighLights

  1. शाम ढलते ही अवसानी हॉल्ट प्लेटफॉर्म अंधेरे में डूब जाता है।

  2. यात्री मोबाइल की फ्लैश लाइट से ट्रेन पकड़ने को मजबूर।

  3. बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को अंधेरे में भारी परेशानी।

संवाद सूत्र, बगहा। बिहार-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित बगहा अनुमंडल का अवसानी हॉल्ट इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। शाम ढलते ही हॉल्ट का प्लेटफॉर्म अंधेरे में डूब जाता है।

बिजली रहने पर तो किसी तरह रोशनी मिल जाती है, लेकिन बिजली कटते ही यात्रियों को मोबाइल की फ्लैश लाइट और टार्च के सहारे ट्रेन पकड़नी पड़ती है। इससे रात में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

स्थिति उस समय और गंभीर हो जाती है, जब रात में 55095 नरकटियागंज-गोरखपुर कैंट पैसेंजर, 55039 गोरखपुर कैंट-नरकटियागंज पैसेंजर और 55048 गोरखपुर कैंट-नरकटियागंज पैसेंजर जैसी ट्रेनें हॉल्ट पर पहुंचती हैं।

पर्याप्त प्रकाश नहीं होने के कारण यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में परेशानी होती है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

Hault Railway Station

यात्रियों के अनुसार, कई बार अंधेरे में प्लेटफॉर्म पर संतुलन बिगड़ने से लोग गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। रात में ट्रेन आने पर यात्रियों को मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर प्लेटफॉर्म पर खड़ा रहना पड़ता है।

अवसानी निवासी रामबाबू यादव ने बताया कि अंधेरे में ट्रेन पकड़ना जोखिम भरा हो गया है। वहीं, रीना देवी ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के साथ रात में यात्रा करने में डर लगता है। मलकौली वार्ड नंबर एक निवासी मुकेश कुमार के अनुसार, कई बार टिकट भी मोबाइल की रोशनी में लेनी पड़ती है।

मंगलपुर के सोनू कुशवाहा ने कहा कि सीमा क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण हॉल्ट पर जल्द रोशनी की व्यवस्था नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

टिकट काउंटर पर भी अंधेरे से परेशानी

अवसानी हॉल्ट की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिजली कटने के बाद कई बार टिकट वितरण का काम भी मोबाइल की रोशनी में करना पड़ता है। पर्याप्त प्रकाश के अभाव में यात्रियों को टिकट लेने में परेशानी होती है। वहीं, टिकट काउंटर पर तैनात कर्मियों को भी अंधेरे में काम करना पड़ता है।

उत्तर प्रदेश के पनियहवा रेलवे स्टेशन के बाद बिहार में प्रवेश करने पर वाल्मीकिनगर रोड स्टेशन और फिर अवसानी हॉल्ट पड़ता है। सीमा क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां बिहार और उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं।

नौकरीपेशा, छात्र, छोटे व्यापारी और ग्रामीण इस हॉल्ट का नियमित रूप से उपयोग करते हैं। इसके बावजूद यहां पर्याप्त प्रकाश समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।

स्थानीय लोगों ने प्लेटफॉर्म पर हाइमास्ट या पर्याप्त एलईडी लाइट लगाने के साथ बिजली कटने की स्थिति में बैकअप व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि अंधेरे का फायदा असामाजिक तत्व भी उठा सकते हैं।

लाइट नहीं होने की जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी लेकर यात्रियों को किसी भी कीमत पर परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - आरके सिंह, जनसंपर्क पदाधिकारी, समस्तीपुर