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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 10, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वैशाली की बरैला झील को बचाने आगे आए ग्रामीण

By JagranEdited By:
Published: Fri, 10 Jul 2020 01:02 AM (IST)Updated: Fri, 10 Jul 2020 06:17 AM (IST)

- जैव विविधता का भी बड़ा केंद्र है बिहार के वैशाली जिले की यह झील वास्तविक स्वरूप में लौट आए ...और पढ़ें

वैशाली की बरैला झील को बचाने आगे आए ग्रामीण
वैशाली की बरैला झील को बचाने आगे आए ग्रामीण

शैलेश कुमार, हाजीपुर

नरकट की झाड़ियों में अपना अस्तित्व खो रहा जैव विविधता का बड़ा केंद्र और सौ गांवों को पानी देने वाली बिहार की बरैला झील को बचाने के लिए अब ग्रामीण आगे आने लगे हैं। वैशाली जिला के जंदाहा-पातेपुर अंचल में फैली इस झील की दुर्दशा की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट करते हुए दैनिक जागरण ने अभियान शुरू किया है।

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झील सूखते ही पानी का संकट

479 एकड़ में फैली इस झील का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि इसके सूख जाने भर से आसपास के करीब सौ गांव प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से प्रभावित हो जाते हैं। पिछले साल की ही बात है कि झील में पानी सूख जाने पर जंदाहा प्रखंड के लोमा, बिझरौली आदि गांवों में टैंकर से पीने का पानी लाना पड़ा था।

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दो दर्जन गांवों में सीधी सिंचाई

इस झील में पानी है तो दो दर्जन गांवों को सीधा लाभ मिलता है। करीब पचास हजार एकड़ में सिंचाई की जा सकती है। इस समय पानी है तो भूगर्भीय जलस्तर दस से पंद्रह फीट पर बना हुआ है। पानी सूखते ही यह 35-40 फीट नीचे चला जाता है। इसका कुप्रभाव यह कि मछुआरों की आजीविका पर मार पड़ती है, क्योंकि मछलियां नहीं रहतीं। खरीफ की खेती भी प्रभावित होती है।

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योजनाएं बनीं, काम शुरू नहीं हुआ

दरअसल, इस झील को नकरट (लंबे घास) ने जकड़ लिया है। गर्मी में झील सूख जाती है। इसे 1997 में ही सलीम अली जुब्बा सहनी पक्षी आश्रयणी के रूप में अधिसूचित किया गया, लेकिन हुआ कुछ नहीं। प्रवासी पक्षियों का भी नाता यहां से टूट रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने भी इसे विकसित करने में रुचि दिखाई थी।

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क्यों कहते हैं बरैला झील

जनश्रुति है कि भगवान राम जनकपुर जाने के क्रम में यहां की प्राकृतिक सुषमा देख ठहरे थे। लोगों ने उनका स्वागत करते हुए कहा, वर अइला यानी वर आए हैं। यही अपभ्रंश होकर बरैला बन गया।

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जीविका के माध्यम से बरैला झील क्षेत्र में पौधारोपण की तैयारी की गई है। यहां बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाएंगे। अक्टूबर में यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा को लेकर भी वन विभाग को योजना भेजी गई है।

भरत भूषण पाल, डीएफओ, वैशाली

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झील के पानी की गुणवत्ता को बचाने की जरूरत है। इसके लिए पहला उपाय यही करना होगा कि झील क्षेत्र में रासायनिक खादों और कीटनाशकों का प्रयोग बंद हो। ऐसा करने से झील की जैव विविधता बचेगी।

रूचि बडोला, विज्ञानी, भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून

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