वैशाली। टेस्ट बदला, मिजाज बदला और बदल गए एशिया फेम सोनपुर मेले के दर्शक। कभी शामियाना, तंबू और कनात से भरा यह मेला आज भव्य हैंगरों व आकर्षक प्लाइराउंड से निर्मित स्टालों में तब्दील होकर लोगों के लिए मनमोहक दृश्य उपब्ध करा रहे हौं। बुजुर्ग बताते हैं कि एक वक्त वह भी था जब शामियाने के नीचे प्रदर्शनी एवं खेल तमाशे हुआ करते थे। शाम ढ़लते ही चारों तरफ पेट्रोमैक्स जलाया जाता था। बदलते समय के साथ सब कुछ बदल गया। लेकिन पुराने लोगों की स्मृतियों में अभी भी उसी दौर का मेला बसा हुआ है। वे कह उठते हैं कि चाहे जो भी हो पर मेले में अब वो बात कहां जो उस वक्त हुआ करता था। तब कई निकटवर्ती जिलों के श्रद्धालुओं का परिवार बैलगाड़ियों में सवार होकर आते थे। दो-तीन दिनों तक पावन नारायणी तट अथवा यहां रिश्ते-नातों के घर ठहराव होता था। मेला के जरिए भूले-बिसरे संबंधियों का मिलन भी होता और रिश्तों में पुन: एक नई ताजगी का संचार हो जाता था।

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