वैशाली। सोनपुर मेले में जवानी का रक्षक एवं बुढ़ापे का सहारा बिक रहा है। खूब डिमांड भी है। गांव के लोग इसे ज्यादा खरीद रहे हैं। एक से बढ़कर एक डिजाइन। जी हां हम बात कर रहे हैं, लाठियों की। एक वह भी जमाना था जब लाठी के लिए बिहार की चर्चा हुई थी। लाठियों में तेल पिलाया गया था। उस दौरान लाठियों की काफी बिक्री हुई थी। मांग के अनुरूप लाठी कम पड़ गई थी। दूसरे प्रदेशों से लाठियां मंगाई गई थी। लाठी का वह क्रेज आज भी बरकरार है। गांवों में आज भी हर घर में लाठी जरुर मिल जाएगी।

हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में विविध सामानों की बिक्री के बीच लाठी का अलग बाजार है। आप यह बात सुनकर चौंक जाएंगे कि मेले में हर वर्ष पचास लाख रुपये से अधिक की लाठियों की बिक्री होती है। मेला में बिकने आए लाठियों की अपनी एक अलग पहचान है। मेला में लाठियां एक से बढ़कर एक डिजाइनों में उपलब्ध है। यह लाठियों का बड़ा बाजार है। मेला में प्रति वर्ष पचास लाख रुपये से अधिक की लाठी बिकती है। मेला में बंगाल, यूपी एवं बिहार समेत कई प्रदेशों के लाठी व्यवसायी पहुंचते हैं। सोनपुर मेला से लौटने वाले लोगों के झुंड में एक से दो लाठी अवश्य हाथ में दिख जाएगी। मेले में प्लेन से लेकर काशीदाकारी की लाठियां उपलब्ध है। मेला घूमने आए लाठी के शौकीन की नजर लाठी दुकान पर बरबस खींच जाती है तथा वे मेला में लाठी खरीदने से अपने आपको रोक नहीं पाते हैं। सोनपुर मेला में लाठी के खरीदार आसपास के जिलों के दुकानदार भी हैं। वे सभी टेम्पो, ठेला एवं माल वाहक से भर-भरकर लाठी खरीदकर ले जाते हैं। मेला में लाठी 25 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के हैं। शौकिया लाठी रखने वाले एवं बुढ़ापा के सहारा के लिए लाठी खरीदने वालों की भीड़ लाठी दुकान पर हमेशा दिख जाएगी। लाठी के खरीददारों को सोनपुर मेला का काफी बेसब्री से इंतजार रहता है।

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