13 बच्चों की मौत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, वैशाली में हादसे के 4 दिन बाद भी जुगाड़ की नाव से जानलेवा सफर
राघोपुर के रामपुर श्यामचंद में 13 बच्चों की नाव दुर्घटना में मौत के चार दिन बाद भी प्रशासन नहीं जागा ...और पढ़ें
HighLights
13 बच्चों की मौत के बाद भी प्रशासन निष्क्रिय।
लोग आज भी जुगाड़ की नाव से यात्रा को मजबूर।
स्थायी पुल या सरकारी नाव की ग्रामीणों की मांग।
संवाद सूत्र, राघोपुर। राघोपुर प्रखंड के रामपुर श्यामचंद में 13 बच्चों की मौत के बाद भी प्रशासन नहीं जागा है। हादसे के चार दिन बीत जाने के बाद भी प्रखंड के अन्य घाटों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रखंड के रामपुर श्यामचंद पंचायत अंतर्गत रामपुर भट्टी के वार्ड नंबर एक के निकट ढाब में आज भी लोग जुगाड़ की नाव से आने-जाने को मजबूर हैं।
बीते मंगलवार को भगतान टोला में भोज खाने जाने के दौरान नाव डूबने से 13 बच्चों की मौत के बाद से लोग काफी डरे और सहमे हुए हैं। लेकिन मजबूरी है कि जान जोखिम में डालकर उसी जुगाड़ की नाव से बच्चों को लेकर आना-जाना पड़ रहा है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर आक्रोश
शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने इस घाट की बदहाली को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर जमकर आक्रोश जताया। स्थानीय अभय कुमार यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह पुराना घाट है, यहां बहुत बड़ी जनसंख्या है।
इधर से लोग आते हैं, इधर के भी लोग आते-जाते हैं और नदी में अभी खेती का समय है। क्या ये घटना जो रामपुर में हुई, वैसा ही हादसा अगर यहां हो जाएगा, तब डीएम सुनेगी, तब सरकार सुनेगी, चाहे जो विधायक है वो तब सुनेंगे। ऐसी स्थिति है यहां राघोपुर की।
बाढ़ में भी नहीं मिली सरकारी नाव
स्थानीय लोगों ने बताया कि रामपुर भट्टी के सामने वार्ड नंबर 1 में ढाब के पानी में जुगाड़ की नाव बनाकर लोग आते-जाते हैं। बाढ़ के दौरान करीब डेढ़ महीने से अधिक समय तक पानी रहने के बावजूद सरकार के स्तर पर नाव की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। उस दौरान भी लोग इसी तरह जुगाड़ की नाव से ही आते-जाते थे।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या फिर से घटना दोहराने के बाद जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, बिहार सरकार और स्थानीय विधायक की नींद खुलेगी?
स्थायी पुल या पक्के घाट की व्यवस्था करने की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि घटना के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है। किसी तरह लोग जान जोखिम में डालकर अपने बच्चों को लेकर जुगाड़ की नाव से नदी पार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से अविलंब सरकारी नाव उपलब्ध कराने और स्थायी पुल या पक्के घाट की व्यवस्था करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, अधिकारी ध्यान नहीं देते। रामपुर श्यामचंद हादसे के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर जल्द ही घाट की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो यहां भी बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और सरकार की होगी।
