'यह चुनाव सरकार बनाने या गिराने का नहीं', वैशाली में बोले PK; राघोपुर में पीड़ितों के साथ बिताएंगे दशहरा
जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर दशहरा के दिन राघोपुर नाव दुर्घटना के पीड़ित परिवारों से मिलेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और एनडीए सरकार पर परिवारों से न मिलने का आरोप लगाया।

शिक्षक-स्नातक संवाद में विचार रखते जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर।
जागरण संवाददाता, हाजीपुर। राघोपुर में बीते मंगलवार को हुई नाव दुर्घटना में 13 मासूमों की मौत पर मातम पसरा हुआ है।
इस बीच शनिवार को हाजीपुर में गहरी संवेदना प्रकट करते हुए जन सुराज के सूत्रधार एवं बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने कहा कि वे दशहरा के दिन 20 अक्टूबर को पीड़ित परिवारों के बीच रहेगे।
करीब-करीब पूरे दिन शोकाकुल परिवार के साथ समय बिताएंगे। पीके ने कहा कि राघोपुर के रामपुर श्यामचंद में 13 बच्चों की मृत्यु हो गई, लेकिन सीएम और एनडीए सरकार को इतना वक्त नहीं कि परिवार के सदस्यों से मिलें।
सीएम और सरकार को समय नहीं
प्रशांत किशोर हाजीपुर में एमएलसी चुनाव को लेकर शिक्षक-स्नातक संवाद में सराय स्थित मुस्कान हाॅल में आयोजित बैठक में बोल रहे थे।
वे तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी श्याम नंदन यादव और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी डाॅ. विमोहन कुमार के साथ शामिल हुए और उनके लिए वोट की अपील की।
कहा कि यह चुनाव न सरकार बनाने का है, न हटाने का, न जात-पात को वोट देने का और न किसी दल के नेता को सदन पहुंचाने का। यह सरकार को जवाबदेह बनाने, अपने वेतनमान और अपने बच्चों के रोजगार के लिए वोट देने का चुनाव है।
खुद को और अपने बच्चों को जिताइए
प्रशांत ने कहा कि नेताओं को जिताया, पार्टियों को जिताया, जातियों को जिताया, एक बार खुद को और अपने बच्चों को जिताइए।
10 हजार नौकरी के वादे से पूरे बिहार में जनप्रतिनिधियों से सवाल खड़ा हुआ कि वे लोग नौकरी क्यों नहीं दे पाएंगे। कोई कह रहा है कि प्रशांत किशोर नहीं दे पाएंगे, कोई कह रहा है कि हम रोजगार देंगे, लेकिन बात रोजगार और सातवें वेतनमान की हो रही है। यही लोकतंत्र और विकल्प की ताकत है।
कहा कि शिक्षकों का आंदोलन 25 वर्षों से चल रहा है, तब किसी ने यह मुद्दा नहीं उठाया। जब प्रशांत किशोर ने बात की और हेल्पलाइन जारी की तो 18 हजार शिक्षकों ने मिस्ड काल कर सहमति दिखाई। उन्होंने कहा कि अब 02 लाख शिक्षक इस अभियान से जुड़ते हैं, तो जो कुछ करना पड़ेगा, करेंगे।
