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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 20, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भगवानपुर के खीरखौआ में चमकी बुखार से नवजात की मौत

By JagranEdited By:
Published: Thu, 20 Jun 2019 11:28 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jun 2019 06:36 AM (IST)

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भगवानपुर के खीरखौआ में चमकी बुखार से नवजात की मौत
भगवानपुर के खीरखौआ में चमकी बुखार से नवजात की मौत

वैशाली :

भगवानपुर प्रखंड के खीरखौआ में चमकी बुखारी से फिर चार दिन के नवजात ने दम तोड़ दिया। मृतक खीरखौआ गांव के विनोद राय का नाती एवं महुआ निवासी बलिराम राय का पुत्र था। इससे पहले भी विनोद राय के पौत्र आदर्श कुमार चमकी बीमारी की चपेट में आ गया था, जिसका इलाज एक निजी क्लीनिक में हुआ। अब वह बिल्कुल ठीक है। विनोद राय के नवजात नाती की मौत भगवानपुर के एक निजी क्लीनिक में हो गई। हालांकि डाक्टर ने चमकी बीमारी की पुष्टि नहीं की है। घटना की जानकारी मिलने पर भगवानपुर की बीडीओ अरोमा मोदी खीरखौआ गांव पहुंचीं और पीड़ित विनोद राय के परिवार परिजनों के ढांढ़स बढ़ाया। हरिवंशपुर, खीरखौआ, बराहरूप एवं सहथा में अबतक 13 बच्चो की मौत एईएस से हो चुकी है।

इधर भगवानपुर की बीडीओ अरोमा मोदी जैसे ही हरिवंशपुर गांव में पहुंचीं और ग्रामीणों से बात किए बिना लौटना चाहा, वैसे ही महिलायों ने बीडीओ की गाड़ी को घेर कर सरकार एवं प्रशासन विरोधी नारे लगाने लगीं। स्थिति को गंभीर देख बीडीओ ने अपनी गाड़ी का शीशा नहीं खोला तथा अपने को ग्रामीणों के द्वारा बंधक बनाए जाने की सूचना वरीय पदाधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष संजय कुमार दलबल के साथ पहुंचे लेकिन तब तक ग्रामीण बीडीओ को छोड़ दिया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि पानी की समस्या एवं चमकी बीमारी के निदान के लिए गांव के लोग मजबूर होकर सड़क पर उतरे थे। ग्रामीणों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, सड़क पर जा रहे राहगीरों के साथ अभद्र व्यवहार करने की प्राथमिकी भगवानपुर थाने में दर्ज कराई गई। ग्रामीणों का कहना था कि सड़क जाम करने में वैसे लोगों पर भी एफआइआर दर्ज की गई है जो चलने में लाचार हैं और लकवा से ग्रस्त हैं।

इधर खीरखौआ में अशोक राय के 13 वर्षीय पुत्र मोहन कुमार एवं सुबोध राय की पुत्री को इलाज के लिये भगवानपुर स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया है। स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी स्वयं हरिवंशपुर में डॉक्टरों के साथ कैंप किए हैं। लेकिन खीरखौआ, बराहरूप, सहथा में कोई मेडिकल कैंप नहीं है। डॉक्टरों की टीम अवश्य जाती है और ओआरएस के साथ कुछ दवाएं देती है। प्रभावित गांवों में सबसे बड़ी समस्या पानी की

ग्रामीणों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या पानी की है। पिछले दो दिनों से पानी टैंकरों से दिया जा रहा है लेकिन आवश्यकता के अनुसार पानी मुहैया नहीं किया जा रहा है। बीमारी के डर से हिरवंशपुर के कई परिवार दूसरी जगहों पर अपने रिश्तेदारों के यहां पलायन कर गए हैं। वही लोग हरिवंश गांव में रह गए हैं जिनके पास माल-मवेशी है। डॉक्टरों की टीम में शामिल डॉ धर्मशीला, डॉ रेखा एवं एएनएम प्रभावित गांवों में महिलायों को एकत्रित कर चमकी बीमारी के लक्षण एवं उसके उपचार के बारे में महिलाओं को जागरूक कर रही हैं।पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों को टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्रामीण रामदेव सहनी कहते है कि पर्याप्त पानी नहीं मिलता है। हरिवंशपुर वार्ड नंबर तीन में पानी आने से पहले वार्ड नंबर पांच के लोग टैंकर को घेर लेते हैं। सिविल सर्जन पहुंचे हरिवंशपुर सराय: चमकी बुखार से भगवानपुर के हरिवंशपुर में सात बच्चों की मौत के एक सप्ताह बाद प्रशासन की नींद खुली। गुरुवार को डीएम राजीव रौशन के हरिवंशपुर गांव आने की सूचना मिलते सिविल सर्जन डॉ. इंद्रदेव रंजन, पीएचईडी एसडीओ अजय कुमार, बीडीओ अरोमा मोदी, थानाध्यक्ष संजय कुमार, कृषि पदाधिकारी ब्रज किशोर चरण, सीएचसी प्रभारी डॉ. धर्मशीला सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने हरिवंशपुर गांव का दौरा किया एवं चमकी बुखार से हुई सात बच्चे की मौत के बाद गांव से हो रहे लोगों के पलायन के संबंध में एवं गांव की समस्याओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। ग्रामीणों का कहना था कि आज तक पदाधिकारी तो दूर कर्मचारी भी गांव में नहीं आए। ग्रामीणों का यह भी कहना था कि गांव के सभी चापाकल सूख गए हैं। पानी का घोर संकट है। सैकड़ों परिवारों के बीच मात्र दो चापाकल है।

डीएम के दौरे की सूचना मिलते ही गांव में दो टैंकर पानी पहुंचाया गया। सीएचसी भगवानपुर द्रारा कैंप लगाकर ग्रामीणों के बीच ओआरएस आदि दवा का वितरण किया गया। बीडीओ ने प्रभावित इलाकों में अनवरत बिजली आपूर्ति बनाए रखने एवं विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए 24 घंटे प्रखंड स्तरीय प्रवेक्षक को वहां तैनात किया।