वैशाली। कहते हैं जहां चाह होती है वहां राह होती है। वैशाली जिले के देसरी अंतर्गत आजमपुर व खरगपुर जैसे इलाकों में जब बाढ़ चली गई तो वहां छोटे झील का निर्माण करती गई। ऐसे झीलों से बड़ी ही मुश्किल से लोग आते-जाते हैं। ऐसी जगहों पर केयर के बीएम जीतेंद्र ने जुगाड़ नाव पर अपने साथियों के साथ टीके का बाक्स रखा और उन घरों में भी दस्तक दी जहां से लोग घर से बाहर निकलने से कतराते हैं।

दरअसल, जीतेंद्र घर-घर दस्तक कार्यक्रम के तहत प्रत्येक घरों तक टीकाकरण को सुनिश्चत कर रहे हैं। हर घर दस्तक अभियान में उनके साथ डब्ल्यूएचओ के विश्वरंजन और डेटा आपरेटर संतोष ने भी अदम्य साहस का परिचय दिया। वहीं अब भी वह टीकाकरण को सफल बनाने में जुटे हैं। जितेंद्र ने कहा कि हमलोगों को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. प्रदीप कुमार का मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहा।

हर मुश्किल को जीतेंद्र ने बनाया आसान

जीतेंद्र कहते हैं कि पोलियो की तर्ज पर चल रहे घर-घर अभियान में खास कर सुदूर इलाके में बसे एक-एक घर तथा गंगा किनारे भी बने गांवों में पहुंचना थोड़ा मुश्किल था। भौगोलिक कारण के साथ शिक्षा का अभाव भी टीकाकरण के राह में रोड़ा था। यह टीकाकरण का ही प्रभाव था कि लोगों को ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं पड़ी। जीतेंद्र कहते हैं कि इस अभियान में अभी तक हमलोग 8,135 घरों तक पहुंच पाए हैं। इसमें से 626 प्रथम डोज तथा 2,671 सेकेंड डोज के साथ कुल 3,297 लोगों ने टीकाकरण कराया है। वहीं देसरी प्रखंड में कुल प्रथम डोज 53,604 तथा 24,282 लोगों ने सेकेंड डोज ली है। भ्रांतियों को खत्म करने को फैलाई जन-जागरूकता

जीतेंद्र कहते हैं कि समाज के कुछ लोगों में यह भ्रम था कि बीपी तथा गंभीर रोगों के लोगों को यह टीका नहीं लेना चाहिए। इस भ्रम को जनप्रतिनिधि, आशा तथा सेविकाओं की मदद से मिटाया गया। जहां से भी भ्रम की बात आती, वहां उनके घर जाकर मैं और स्वास्थ्यकर्मी टीकाकरण करवाते थे। वहीं लोगों में टीकाकरण के लिए प्रेरणा आए इसके लिए केयर की तरफ से मोटरसाइकिल पर एक व्यक्ति माइकिग भी करता चलता है। ताकि लोगों को जानकारी मिल सके।

Edited By: Jagran