वैशाली [शैलेश कुमार]। हेल्मेट ढाबा, नाम सुनकर चौंकिए मत। यह हेल्मेट की दुकान नहीं बल्कि सड़क किनारे चल रहा ढाबा ही है, परंतु इसकी कार्यशैली थोड़ा आम ढाबों से हटकर है। व्यंजनों के साथ ढाबा रोड सेफ्टी के क्षेत्र में काम कर रहा है। ढाबे में ऐसे लोगों को रोजगार दिया गया है जिनके परिजन हादसे में जान गंवा चुके हैं। जल्द ही एंबुलेंस सेवा भी शुरू करने की योजना है। 

हर हफ्ते एक को मुफ्त हेलमेट 

हाजीपुर-मुजफ्फरपुर एनएच-22 पर गोरौल में चल रहा हेल्मेट ढाबा बाइक चालकों को रोड सेफ्टी का ज्ञान करा रहा है। ढाबे की दीवारों पर लगे फ्लैक्स में रोड सेफ्टी के नारे लिखे हैं। हर सप्ताह कूपन से ड्रॉ निकाल एक बाइक चालक को आइएसआइ मार्का हेलमेट मुफ्त दिया जाता है।

हेल्मेट ढाबे में 50 रुपये या उससे अधिक का व्यंजन खाने पर ग्राहक को कूपन दिया जाता है। हर बुधवार को ड्रा निकाला जाता है। इस साल एक अगस्त को खुले इस ढाबे से अब तक यूपी के अलीगढ़ के द्रिवेश कुमार, वैशाली के जितेंद्र कुमार, जितेंद्र राय, रंजीत कुमार, कोमल कुमार हेलमेट पा चुके हैं। दूरदराज के ग्राहकों को कूरियर से हेल्मेट भेजा जाता है। 

ड्रा निकलते दी जाती सूचना 

कूपन पर दर्ज नाम-पता और मोबाइल नंबर के आधार पर ड्रा निकलते ही फोन से जानकारी दी जाती है। ड्रॉ निकालने के लिए अतिथि के रूप में अधिकारियों को बुलाया जाता है।

ऐसे मिली हेल्मेट ढाबा खोलने की प्रेरणा

ढाबे के संचालक संजय कुमार 2007 से ही राष्ट्रीय राजमार्ग परिवहन मंत्रालय के रोड सेफ्टी विंग से जुड़े रहे हैं। कई बार बिना किसी सरकारी मदद के रोड सेफ्टी के लिए अभियान चला चुके हैं।

उनका कहना है कि एनएच और स्टेट हाईवे पर रफ्तार पर रोक तो नहीं लगाई जा सकती, लेकिन सुरक्षित सफर के लिए बाइक चालक हेल्मेट का इस्तेमाल तो कर ही सकते हैं। हादसों में अधिकतर उन बाइक सवारों की जान जा रही है जो हेल्मेट नहीं पहनते हैं। 

 

Posted By: Kajal Kumari