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National Highway 327E: जाम में थम जाती है सुपौल के त्रिवेणीगंज की रफ्तार, आखिर कब बदलेगी सूरत?

Published: Tue, 21 Apr 2026 01:39 PM (IST)

त्रिवेणीगंज शहर में ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या है, जिससे लोगों को घंटों का सामना करना पड़ता है। NH-327 ई ...और पढ़ें

जाम में थम जाती है त्रिवेणीगंज की रफ्तार, कब बदलेगी सूरत (जागरण)

जाम में थम जाती है त्रिवेणीगंज की रफ्तार, कब बदलेगी सूरत (जागरण)

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संवाद सूत्र, त्रिवेणीगंज (सुपौल)। सुबह स्कूल जाने की जल्दी हो या शाम को बाजार से घर लौटने की मजबूरी इन सबके बीच त्रिवेणीगंज शहर में हर रास्ता अक्सर जाम में जाकर रुक जाता है। अनुमंडल बने तीन दशक गुजर गए, नगर परिषद का गठन भी हो गया, लेकिन शहरवासियों की सबसे बड़ी परेशानी आज भी वही पुरानी ट्रैफिक जाम की हैं।

किसी शायर की पंक्तियां यहां की हकीकत बयान करती नजर आती हैं मुद्दतों हमने किया है मुश्किलों का सामना, अब तो मेरे शहर की सूरत बदलनी चाहिए। शहर के बीच से गुजरने वाली एनएच-327 ई रोजाना जाम की चपेट में रहती है। कभी-कभार हालत यह हो जाता है कि कुछ मिनट की दूरी तय करने में लोगों को घंटों लग जाते हैं।

स्कूली बच्चे, कालेज के छात्र, दफ्तर जाने वाले कर्मी और आम राहगीर रोज इस समस्या से जूझते हैं। प्रशासनिक स्तर पर कई बार पहल की गई, लेकिन जाम से स्थायी राहत नहीं मिल सकी। शहर में चार जगह आटो स्टैंड के लिए निर्धारित एसडीएम ने इस संबंध में आदेश निकालकर इसे पालन कराने का निर्देश भी दिया था।

एसडीएम द्वारा जारी आदेशों का प्रभावी अनुपालन नहीं हो पा रहा है। जिससे अब शहरवासियों की जुबान पर एक ही सवाल है आखिर कब बदलेगी त्रिवेणीगंज की ट्रैफिक व्यवस्था। शहर की सड़कें वर्षों पुरानी चौड़ाई पर ही टिकी हैं। बाजार क्षेत्र में दोनों ओर मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान होने के कारण सड़क चौड़ीकरण भी आसान नहीं दिखता।

नतीजतन, एक बड़ी गाड़ी के प्रवेश करते ही पूरा बाजार जाम की गिरफ्त में आ जाता है। ऐसे में अनुमंडल प्रशासन और नगर परिषद से अब ठोस एवं दीर्घकालिक कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है। एनएच-327 ई के दोनों किनारों पर बढ़ता अतिक्रमण जाम की मुख्य वजह बन चुका है।

दुकानदारों द्वारा सड़क तक सामान फैलाना और ठेला-खोमचा वालों का कब्जा सड़क की चौड़ाई को और कम कर देता है। शाम के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई जगहों पर अस्थायी दुकानें लग जाने से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित होती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक आटो और ई-रिक्शा चालकों के लिए निर्धारित स्टैंड को सख्ती से लागू नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमित कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जाम की समस्या से राहत मिलना संभव नहीं है।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल आदेश जारी करने के बजाय ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि त्रिवेणीगंज को जाम की समस्या से स्थायी राहत मिल सके।

ई-रिक्शा भी चुनौती

तेजी से बढ़ रहे ई-रिक्शा लोगों के लिए सुविधा के साथ परेशानी भी लेकर आया है। पुरानी बैंक चौक और दुर्गा मंदिर चौक जैसे व्यस्त इलाकों में सड़क किनारे बेतरतीब ढंग से ई-रिक्शा खड़ा कर सवारी उतारने-चढ़ाने से जाम की समस्या बढ़ जाती है।

भीड़भाड़ के बीच अचानक वाहन मोड़ देने की प्रवृत्ति से अन्य वाहनों को ब्रेक लगाना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। सड़क किनारे दोपहिया और चारपहिया वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग भी जाम का बड़ा कारण बन रही है।