सुपौल के सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था बदहाल, बच्चे खेत-खलिहानों में मस्त; हेडमास्टर मोबाइल में व्यस्त
सुपौल के जदिया स्थित उर्दू मध्य विद्यालय मोगलाघाट नंदना में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुली, जहां बच्चे स्कूल समय में खेतों में घूमते मिले और प्रधानाध्यापक मोबाइल में व्यस्त थे।

बच्चे खेत-खलिहानों में मस्त; हेडमास्टर मोबाइल में व्यस्त (जागरण)

समय कम है?
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संवाद सूत्र, जदिया (सुपौल)। उर्दू मध्य विद्यालय मोगलाघाट नंदना में सोमवार को शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सरकारी विद्यालयों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और अनुशासित बनाने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
विद्यालय समय में बच्चे कक्षा छोड़कर खेत-खलिहानों और बगीचों में घूमते रहे, जबकि जिम्मेदार शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से बेखबर दिखाई दिए। सोमवार सुबह करीब 9:44 बजे विद्यालय परिसर का नजारा चौंकाने वाला था।
विद्यालय के कई छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने के बजाय पास स्थित महोगनी बगीचे, मक्का के खेत और खलिहानों में खेलते नजर आए। तेज धूप और भीषण गर्मी के बावजूद बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर विद्यालय प्रशासन पूरी तरह लापरवाह दिखा।
मोबाइल फोन में व्यस्त प्रधानाध्यापक
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार बरामदे में कुर्सी लगाकर मोबाइल फोन में व्यस्त बैठे थे। मीडिया कर्मी के पहुंचने के बावजूद उन्होंने बाहर घूम रहे बच्चों को विद्यालय में बुलाने या उन्हें नियंत्रित करने की कोई कोशिश नहीं की, बल्कि वे खुद उठकर चुपचाप एक कमरे में चले गए।
स्थानीय ग्रामीण मु. उमर और सुलेमान ने बताया कि विद्यालय में अव्यवस्था का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी विद्यालय परिसर में बच्चों के आम के पेड़ों पर चढ़ने और करीब 12 फीट ऊंची दीवार फांदने का वीडियो बनाकर त्रिवेणीगंज प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा गया था।
ग्रामीणों ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की थी। अधिकारियों द्वारा जांच का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। जब इस संबंध में प्रधानाध्यापक से सवाल किया गया तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि विद्यालय में परीक्षा चल रही थी, इसलिए बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जा सका।
हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय के शिक्षक लगातार अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और अनुशासन पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि सरकारी विद्यालयों में इसी तरह लापरवाही जारी रही, तो गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। अब देखने वाली बातें यह होगी कि शिक्षा विभाग द्वारा इस गंभीर लापरवाही को लेकर आखिर कब तक ओर क्या कार्रवाई की जाती है।
