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पीएम पोषण योजना में फर्जीवाड़ा: हवा में बन रही थी हाजिरी, सुपौल में 3 हेडमास्टरों से होगी 6.5 लाख की रिकवरी

Published: Thu, 17 Sep 2026 05:59 PM (IST)

सरकारी स्कूलों में प्रधानमंत्री पोषण योजना में अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसके तहत सुपौल जिले के तीन प्रधानाध्यापकों ...और पढ़ें

सुपौल में पीएम पोषण योजना घोटाला, तीन प्रधानाध्यापकों से होगी 6.51 लाख की वसूली (AI Generated Image)

सुपौल में पीएम पोषण योजना घोटाला, तीन प्रधानाध्यापकों से होगी 6.51 लाख की वसूली (AI Generated Image)

HighLights

  1. सुपौल में पीएम पोषण योजना में अनियमितता का खुलासा।

  2. तीन प्रधानाध्यापकों से 6.51 लाख रुपये की वसूली का आदेश।

  3. भौतिक उपस्थिति और दर्ज उपस्थिति में भारी अंतर पाया गया।

जागरण संवाददाता, सुपौल। सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन से जुड़ी प्रधानमंत्री पोषण योजना में अनियमितता का मामला सामने आया है। जिले के तीन विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान एमआईएस में दर्ज पिछले सप्ताह की औसत उपस्थिति और विद्यालय में भौतिक रूप से मौजूद बच्चों की संख्या में काफी अंतर पाया गया।

विभागीय जांच के बाद संबंधित प्रधानाध्यापकों से कुल करीब 6.51 लाख रुपये की वसूली का आदेश दिया गया है। इनमें 41.02 से लेकर 76.32 फीसद तक का अंतर पाया गया।

विभाग ने इसे प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत खाद्यान्न और राशि के दुरुपयोग से जोड़ते हुए संबंधित प्रधानाध्यापकों को निर्धारित राशि एक सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है।

राशि जमा नहीं करने पर विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय फिंगलास के मामले में वेतन से 20 फीसद राशि की कटौती कर वसूली करने की बात कही गई है।

चैनपुर में 41.02 फीसद का अंतर

मध्य विद्यालय चैनपुर, प्रखंड छातापुर में 19 अगस्त को हुए निरीक्षण में उपस्थिति के आंकड़ों में बड़ा अंतर मिला। विद्यालय में कुल 731 विद्यार्थी नामांकित थे। उपस्थिति पंजी में 458 विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज थी, जबकि निरीक्षण के समय भौतिक रूप से 394 विद्यार्थी ही मौजूद मिले।

वहीं, एमआईएस के अनुसार, पिछले सप्ताह की औसत उपस्थिति 668 विद्यार्थी प्रतिदिन थी। विभागीय आकलन में भौतिक उपस्थिति और औसत उपस्थिति के बीच 41.02 फीसद का अंतर पाया गया। इसके आधार पर पिछले तीन माह में प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत खर्च की गई राशि और खाद्यान्न की गणना की गई।

एमआईएस के अनुसार तीन माह में परिवर्तन मूल्य तथा अंडा, मौसमी फल मद में 3,51,585 रुपये और 4,737 किलोग्राम चावल का खर्च दर्ज था। 41.02 फीसद के आधार पर 1,44,220 रुपये तथा 1,943.11 किलोग्राम चावल की राशि निर्धारित की गई।

विभागीय दर से चावल का मूल्य 85,331 रुपये आंका गया। इस प्रकार प्रधानाध्यापक से कुल 2,29,551 रुपये की वसूली का आदेश दिया गया है।

चापीन में 64.53 फीसद का अंतर

मध्य विद्यालय चापीन, प्रखंड छातापुर में भी निरीक्षण के दौरान उपस्थिति के आंकड़ों में काफी अंतर पाया गया। विद्यालय में 614 विद्यार्थी नामांकित थे, लेकिन निरीक्षण के समय भौतिक रूप से केवल 133 विद्यार्थी उपस्थित मिले। एमआईएस में पिछले सप्ताह की औसत उपस्थिति 375 दर्ज थी।

विभाग के अनुसार वास्तविक और औसत उपस्थिति के बीच 64.53 फीसद का अंतर पाया गया। तीन माह में परिवर्तन मूल्य एवं अंडा, मौसमी फल मद में 2,06,416 रुपये तथा 2,776.90 किलोग्राम चावल का व्यय एमआईएस में दर्ज था।

विभागीय गणना के अनुसार 64.53 फीसद के आधार पर 1,33,200 रुपये तथा 1,791.934 किलोग्राम चावल की राशि निर्धारित की गई। चावल का मूल्य 78,692 रुपये आंका गया। इस प्रकार प्रधानाध्यापक से कुल 2,11,892 रुपये की वसूली का आदेश दिया गया है।

फिंगलास में 76.32 फीसद का अंतर

उत्क्रमित मध्य विद्यालय फिंगलास, प्रखंड राघोपुर में स्थिति और अधिक गंभीर पाई गई। 9 मई को विद्यालय के निरीक्षण के दौरान कुल 365 विद्यार्थियों के नामांकन के विरुद्ध उपस्थिति पंजी में 257 विद्यार्थी दर्ज थे, जबकि भौतिक रूप से केवल 63 बच्चे ही मौजूद मिले।

पिछले सप्ताह की औसत उपस्थिति 203 बताई गई थी। विभाग के अनुसार भौतिक उपस्थिति और औसत उपस्थिति में 76.32 फीसद का अंतर पाया गया। इस मामले में विभाग द्वारा पूर्व में भी स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन प्रधानाध्यापक का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया।

एमआईएस के अनुसार तीन माह में परिवर्तन मूल्य एवं अंडा, मौसमी फल मद में 1,71,376 रुपये तथा 2,336.500 किलोग्राम चावल का व्यय दर्ज था।

76.32 फीसद के आधार पर 1,30,794 रुपये तथा 1,783.217 किलोग्राम चावल की राशि निर्धारित की गई। चावल का मूल्य 78,309 रुपये आंका गया। विभाग ने कुल 2,09,103 रुपये की वसूली का आदेश दिया है।

10 फीसद से अधिक अंतर पर हो सकती है वसूली

इस संबंध में पीएम पोषण योजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी महेश पासवान ने बताया कि शिक्षा विभाग के 29 अक्टूबर 2013 के निर्देश के अनुसार विद्यालय में मध्याह्न भोजन के लाभार्थियों की भौतिक उपस्थिति और पिछले सप्ताह की औसत उपस्थिति में 10 फीसद से अधिक का अंतर मिलने पर संबंधित प्रधानाध्यापक से खाद्यान्न एवं राशि की वसूली की जा सकती है।

इसी प्रविधान के तहत तीनों विद्यालयों के मामलों में कार्रवाई की गई है। विभाग ने संबंधित प्रधानाध्यापकों को निर्धारित राशि एक सप्ताह के भीतर आरटीजीएस/एनईएफटी के माध्यम से बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना समिति, सुपौल के खाते में जमा करने का निर्देश दिया है।

निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिंगलास विद्यालय के मामले में विभाग ने शिक्षा विभाग के 27 दिसंबर 2024 के निर्देश का हवाला देते हुए कहा है कि राशि जमा नहीं करने पर प्रधानाध्यापक के मासिक वेतन से 20 फीसद की कटौती कर दुरुपयोग की गई राशि की पूरी वसूली की जाएगी।