बिहार में किसानों के लिए GOOD NEWS: खाद के लिए अब नहीं लगानी पड़ेगी लाइन, घर बैठे होगी बुकिंग
सुपौल के किसानों को अब खाद के लिए दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे घर बैठे मोबाइल से ऑनलाइन ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड फोटो
HighLights
किसान अब मोबाइल से घर बैठे खाद बुक कर सकेंगे।
FASAS डिजिटल प्रणाली से वितरण में पारदर्शिता आएगी।
QR कोड के माध्यम से अधिकृत विक्रेता से खाद मिलेगी।
जागरण संवाददाता, सुपौल। खरीफ और रबी मौसम में उर्वरक के लिए अब जिले के किसानों को दुकानों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। किसान घर बैठे मोबाइल के माध्यम से उर्वरक की आनलाइन बुकिंग कर सकेंगे।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित, किसान केंद्रित और मांग आधारित बनाने के उद्देश्य से फ्रेमवर्क फोर फर्टिलाइजर सेल (एफएसएएस) नामक डिजिटल प्रणाली विकसित की है।
सुपौल जिले को इस व्यवस्था के दूसरे चरण में शामिल किया गया है। जिले में इसे इस महीने से इसे लागू कर दिया गया है। जिला कृषि पदाधिकारी नीतीश कुमार भारती ने बताया कि इस एप के माध्यम से किसान अपने मोबाइल से खाद की आनलाइन बुकिंग कर सकेंगे।
किसान की जमीन और उसमें लगी फसल के आधार पर उर्वरक की आवश्यकता निर्धारित की जाएगी। बुकिंग के बाद किसान को क्यूआर कोड उपलब्ध कराया जाएगा। किसान अधिकृत खुदरा उर्वरक विक्रेता की पीओएस मशीन पर क्यूआर कोड स्कैन कर निर्धारित मात्रा में उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।
नई व्यवस्था से किसानों को समय पर उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही उर्वरक की कालाबाजारी पर भी प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।
पांच जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के बाद सुपौल शामिल
कृषि विभाग ने पहले चरण में राज्य के पांच जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस डिजिटल व्यवस्था को लागू किया था। इसके बाद दूसरे चरण में सुपौल को इसमें शामिल किया गया है। इस व्यवस्था के तहत आनलाइन उर्वरक खरीदने के लिए किसानों का फार्मर आइडी होना अनिवार्य है।
ऐसे किसान जिनकी जमाबंदी उनके पूर्वजों के नाम पर दर्ज है या जिनका नाम जमाबंदी में दर्ज नहीं है, वे भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।
इसके अलावा दूसरे भूस्वामी की जमीन, सामुदायिक भूमि, मंदिर की भूमि, सरकारी या संस्थागत भूमि, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) तथा अन्य भूमि पर बटाईदार के रूप में खेती करने वाले किसान भी इस प्रणाली के माध्यम से उर्वरक की बुकिंग करा सकेंगे।
किसान पहचान-पत्र से जुटाई जाएगी जमीन की जानकारी
जिन किसानों की भूमि संबंधी जानकारी किसान रजिस्ट्री में उपलब्ध है, उनका आवश्यक विवरण किसान पहचान-पत्र के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। वहीं, अन्य किसान भी एफएसएएस पर पंजीकरण कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।
इसके लिए संबंधित खेत का खाता एवं खेसरा संख्या, क्षेत्रफल और फसल का विवरण देना होगा। उपलब्ध जानकारी के आधार पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) की अनुशंसाओं के अनुरूप किसान के लिए उर्वरक की आवश्यकता की गणना की जाएगी।
तीन दिनों तक मान्य रहेगा क्यूआर कोड
उर्वरक की आवश्यकता निर्धारित होने के बाद किसान को क्यूआर कोड उपलब्ध कराया जाएगा। यह क्यूआर कोड तीन दिनों तक मान्य रहेगा। किसान क्यूआर कोड में अंकित अधिकृत उर्वरक विक्रेता के यहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान कर आनलाइन खाद खरीद सकेंगे।
नई व्यवस्था के तहत किसान को उसकी निर्धारित आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और किसानों को खाद की उपलब्धता के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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