-फलफूल रहा सेहत का कारोबार, बड़े-बड़े भवनों में बड़े-बड़े डिग्रीधारी डाक्टरों के नाम का लगा दिया जाता बड़ा सा बोर्ड -------------------------------------- जागरण संवाददाता, सुपौल: सेहत का कारोबार जिले में काफी फल फूल रहा है। बड़े-बड़े भवनों में बड़े-बड़े डिग्रीधारी डाक्टरों के नाम का बड़ा सा बोर्ड लगा दिया जाता है और कारोबार शुरू कर दिया जाता है। भले ही आपको उस नामी गिरामी डाक्टरों के दर्शन भी कभी हों कि नहीं। कोई विभागीय अंकुश नहीं होने की वजह से बेहिचक यहां तमाम स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने की गारंटी होती है। खासकर ये इमरजेंसी सेवा के लिए अपना व्शिेष दावा रखते हैं। यहां ना तो स्वास्थ्य मानकों का ध्यान रखा जाता है और ना ही ये स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध होते हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी अनुसार अब तक महज तीन क्लीनिक अथवा अस्पतालों को ही अनुमति प्राप्त है वह भी प्रोविजनल। बांकी ने तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को आवेदन देना भी मुनासिब नहीं समझा है। सरकारी निर्देशों के बावजूद विभाग ने कभी इस बाबत कोई सख्ती नहीं दिखाई अथवा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। कोरोना संक्रमण के काल में कुछ निजी अस्पतालों को भी सरकारी स्तर पर चिह्नित करते कोरोना के इलाज के लिए मान्यता दी गई। वैसे अस्पतालों को भी अविलंब विभागीय मानकों और नियमों को फालो करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन विभाग से संबद्ध अस्पतालों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ।

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जहां तहां दिख जाते हैं ऐसे अस्पताल

जिला मुख्यालय समेत प्रखंडों अथवा छोट़े-छोटे बाजारों में भी जहां-तहां अस्पताल दिख जाते हैं। भले ही अपने पास डिग्री कोई भी हो लेकिन बड़े-बड़े आपरेशन से भी ये नहीं हिचकते। इनका नेटवर्क काफी फैला होता है जिससे इन्हें अपने कारोबार में कोई परेशानी नहीं होती और अच्छा खासा मरीज इनके पास भी होता है। भले ही सदर अस्पताल में सारी सुविधा रहते जो आपरेशन नहीं होता हो इनके यहां बेहिचक कर दिया जाता है। इसी का नतीजा होता है कि कई बार केस खराब होने पर हंगामा और तोड़फोड़ की नौबत भी आ पड़ती है।

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आयुक्त के निर्देश पर जांच दल का गठन

प्रमंडलीय आयुक्त ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जांच दल गठित कर ऐसे संस्थान, दुकान,चिकित्सालय, पैथोलाजी,एक्सरे, अल्ट्रासाउंड,आदि की गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध् विधि सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पत्र के आलोक में जिलाधिकारी ने प्रखंड स्तर तक जांच दल का गठन कर दिया है। जिसमें रोगियों का इलाज, दवा,जांच तथा चिकित्सक द्वारा फीस,आपरेशन फीस के लिए ली जा रही राशि की प्राप्ति रसीद मरीज अथवा उनके परिजनों को दी जा रही है अथवा कि नहीं इसकी गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है। इधर आयुक्त ने पत्र जारी कर निजी अस्पतालों में मरीजों के साथ हो रहे व्यवहार और ली जा रही फीस वगैरह की जांच कर रिपोर्ट समर्पित करने के लिए निर्देश जारी किया है। जारी निर्देश के बाद जिलाधिकारी ने जांच टीम गठित कर दी है। अब यह टीम जांच कर रिपोर्ट समर्पित करेगी।

Edited By: Jagran