जागरण संवाददाता, सुपौल: जिला न सिर्फ धान खरीद मामले में नंबर वन पर है बल्कि किसानों से खरीदे गए धान के बदले उन्हें किए जाने वाले भुगतान मामले में भी बिहार में पहले पायदान पर है । अब तक जिले में जिन 1086 किसानों से सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद की गई है उनमें से 628 किसानों का भुगतान भी कर दिया गया है। जिले में अब तक 1086 किसानों से 7435. 244 एमटी धान की खरीद की जा चुकी है जो राज्य में किसी भी जिले से अधिक है। हालांकि दूसरे नंबर पर अररिया जिला है। जहां 5376.21 एमटी धान की खरीद हो पाई है। दरअसल सरकार ने इस बार धान खरीद मामले में एक अलग नीति अपनाई। इससे पूर्व जब तक जिले में धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया आरंभ होती थी तब तक जिले के छोटे और मझोले किस्म के किसान अपने उत्पादन को जरूरत के मुताबिक औने पौने दामों पर बेच देते थे, जिससे इन किसानों को सरकार की इस व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पाता था। इस बार सरकार ने ऐसे किसानों की जरूरत को देखते हुए एक नवंबर से ही धान खरीद करने की व्यवस्था कर दी। जिसका परिणाम है कि धान अधिप्राप्ति को शुरू हुए महज 25 दिन हुए हैं, जिला ना सिर्फ धान खरीद मामले में अव्वल है बल्कि सरकार के इस व्यवस्था का लाभ छोटे और मझोले किसान भी उठा रहे हैं। अब तक जिन 1086 किसानों से धान खरीद की जा चुकी है उसमें से 628 किसानों के बीच 8559 1273 .50रू का भुगतान भी किया जा चुका है

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27 पैक्सों ने अब तक नहीं शुरू की है धान खरीद

खरीफ विपणन वर्ष 2021- 22 में विभाग ने जिले के जिन 153 पैक्स तथा 10 व्यापार मंडल को धान खरीद की अनुमति दी थी उनमें से अभी तक 126 पैक्स और तीन व्यापार मंडल ही धान खरीद शुरू कर पाए हैं । शेष 27 पैक्स और 7 व्यापार मंडल अधिप्राप्ति के 25 दिन बीतने के बाद भी खरीद का श्रीगणेश नहीं कर पाए हैं । हालांकि ऐसे समितियों को धान खरीद शुरू करने को लेकर विभाग ने स्मारित करते हुए जल्द धान खरीद शुरू करने को कहा है। नहीं करने पर सीसी कैंसिल करने के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।

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धान बेचने के लिए अब तक 28309 किसानों ने किया है निबंधन

सरकार द्वारा समर्थित मूल्य पर धान बेचने के इच्छुक 18309 किसानों ने सहकारिता विभाग के वेबसाइट पर निबंधन कराया है। जिसमें 10379 रैयत तथा 17930 गैर रैयत किसान शामिल हैं ।हालांकि निबंधन का कार्य अभी चालू है परंतु निबंधित किसानों के आंकड़ों को देख यही लगता है कि सरकार द्वारा समर्थित न्यूनतम मूल्य पर आज भी रैयत किसान केअपेक्षा गैर रैयत किसान अधिक रूचि ले रहे हैं।

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उसना चावल मिल का जिले में है अकाल

किसानों से खरीदे गए धान का चावल तैयार करने को लेकर सहकारिता विभाग मिल का भी निबंधन करती है ताकि एस एफ सी को चावल आपूर्ति की जा सके। पिछले दिनों सरकार ने उसना चावल की आपूर्ति करने का आदेश दिया था परंतु जिले में उसना चावल मिलों का अकाल पड़ा हुआ है विभाग ने अब तक जिन 26 मील का निबंधन चावल तैयार करने को लेकर किया है उसमें से महज तीन उस ना मिल ही शामिल है बाकी 23 अरवा चावल बनाने वाला ही मिल हैं। ऐसे में इस वर्ष सत प्रतिशत उसना चावल आपूर्ति हो सकेगा फिलहाल यह संभव होते नहीं दिख रहा है। हालांकि पिछले दिनों जिलाधिकारी ने ऐसे मिलरों को उसना चावल तैयार करने वाले संयंत्र लगाने को कहा ताकि भविष्य में उन्हें किसी तरह की कठिनाई न हो सके।

Edited By: Jagran