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सुपौल। ईस्ट-वेस्ट-कॉरिडोर के भपटियाही बाजार समीप अब तक बस स्टैंड नहीं बनाए जाने के कारण सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है। एनएचएआई द्वारा जो बस स्टैंड बनाए गए हैं उसकी दूरी बाजार मोड़ से अधिक रहने के कारण वहां कोई गाड़ी खड़ी करना नहीं चाहता है। हालत यह रहती है कि नेशनल हाईवे से भपटियाही सुपौल की तरफ मुड़ते ही बार बार घटनाएं हुआ करती है। इस मोड़ पर अब तक कई जानें गई है जिसको लोगों ने नजदीक से देखा है। घटना के बाद वहां पदाधिकारी भी पहुंचते हैं लेकिन समस्या के समाधान को लेकर कोई कार्रवाई नहीं होती है।

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बैठक में डीएम ने अधिकारियों को दिया था निर्देश

कुछ माह पूर्व थाना परिसर में जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक ने एनएचएआई के अधिकारियों के साथ एक बैठक की थी तथा हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लगने वाली जाम से निजात के लिए हाईवे के बगल के गड्ढे को पूर्वी कोसी तटबंध तक भरवाने तथा वहां वाहनों को खड़ी रखने की जगह देने को कहा था। बैठक में डीएम ने यह भी कहा था कि यदि तटबंध और हाईवे के बीच के गड्ढे भर दिए जाएं तो काफी दूरी तक दुकानदारों को भी बसने की जगह मिल जाएगी। डीएम ने हाईवे के किनारे सुलभ शौचालय बनवाने सहित अन्य निर्देश भी दिए थे। लेकिन उस बैठक के निर्णय की दिशा में अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

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सड़क पर खड़ी रहती है गाड़ी

नेशनल हाईवे पर पश्चिम तथा पूरब की दिशा में बड़े बड़े वाहनों की कतार लगी रहती है तो हाईवे से सुपौल जाने के रास्ते में भी दोनों ओर सुबह से शाम तक वाहनों के खड़े रहने से लोगों को भारी कठिनाइयों से जूझना पड़ता है। सड़क पर वाहन खड़ी रहने के कारण बार बार दुर्घटनाएं होती है। यह सब देख कर भपटियाही पुलिस सिर्फ मूकदर्शक बनी रहती है। भपटियाही बाजार में भी जगह-जगह हाट के दिन वाहन को खड़े कर दिए जाने से जाम की समस्या बन जाती है।

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अति व्यस्त रहती है सड़क

नेशनल हाईवे से भपटियाही बाजार होते सुपौल सहरसा की ओर जाने वाली सड़क पर हर दिन व्यस्त रहा करती है। जिले की सबसे अधिक व्यस्त सड़क पर जब वाहनों की कतार खड़ी होती है तब दूर-दूर से आने वाले गाड़ी के चालक सकते में देखे जाते हैं। हाईवे से नीचे उतरते समय यदि चालक का आंख थोड़ा भी ओझल होता है तो कोई न कोई घटनाएं घट जाती है। टेम्पू चालकों की मनमानी कि वह आधी सड़क तक अपने अपने टेंपू को खड़ा कर सवारी ढ़ूंढ़ता रहता है। ऐसे में यदि कोई उनको ऐसा करने से मना भी करे तो वह सब उलझ पड़ता है। कभी-कभी तो परिस्थिति यहां तक होती है कि लोगों को पैदल चलने में भी कठिनाई महसूस होने लगती है। इतने के बाद भी जिला प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारी इस गंभीर समस्या के निदान पर कोई ठोस निर्णय नहीं दे रहे हैं।

Posted By: Jagran

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