सुपौल : कोसी पर तटबंध निर्माण के साथ ही सुपौल, सहरसा, मधुबनी व दरभंगा जिले के कुल 386 गांव के लोगों के समक्ष पुनर्वास की समस्या खड़ी हो गई। सन 1960 तक केवल 70 गांवों को पुनर्वासित किया जा सका था। 1972.73 तक लगभग 54 हजार पुनर्वास योग्य परिवारों में से 32 हजार 540 परिवारों को तटबंध के बाहर बसाने के लिये गृह निर्माण की प्रथम किस्त मिली थी। जिनमें से 10,580 परिवारों ने दूसरी किस्त भी ली लेकिन तीसरी व अंतिम किस्त शायद किसी को नहीं मिल सकी थी। आजीविका की समस्या का समाधान नहीं हो सकने के कारण इन विस्थापितों को खेती करने के लिये अपने ही गांव जाना पड़ता था। धीरे.धीरे पुनर्वास की अधिकांश जमीन पर जल जमाव बढ़ने लगा और लोग अपनी पुस्तैनी जमीन पर लौटने लगे। संभवत: सरकार को ऐसा लगा कि लोगों को अपनी पैतृक संपत्ति का मोह नहीं जा पा रहा है। इसीलिये लोग गांव वापस लौट रहे हैं। और पुनर्वास का काम पूरा होने से पहले ही समाप्त हो गया।

Posted By: Jagran

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