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सुपौल। वाहन चलाते समय यातायात के नियमों की अनदेखी भी सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है। यहां यातायात का नियम वाहन चालकों की मनमर्जी पर निर्भर है। एक बाइक पर तीन लोगों के बैठने तथा बिना हेलमेट के बाइक चलाना यहां आम बात है। रही सही कसर सड़कों पर बेतरतीब ढंग से वाहनों को खड़ी कर देने की मिली छूट पूरी कर देती है। ऐसे में जिले में प्रतिदिन औसत तीन से चार लोग हादसों में घायल होते हैं। हर तीन दिन पर एक व्यक्ति की औसतन हादसे में जान चली जाती है। यातायात नियमों की अनदेखी वाहन चालकों पर भारी पड़ रही है। लेकिन न तो वाहन चालक इस तरफ ध्यान देते हैं और ना ही जिले में यातायात नियमों का पालन कराने के प्रति प्रशासन स्तर पर ध्यान दिया जाता है।

ऐसी भी बात नहीं कि यहां कभी इस व्यवस्था पर लगाम लगाने का प्रयास नहीं होता। समय-समय पर वाहन चेकिग अभियान जरूर चलाया जाता है। इस अभियान में बिना हेलमेट के बाइक चलाने वालों से लेकर अगर एक बाइक पर तीन लोग सवार हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है, लेकिन वाहन चेकिग अभियान भी यातायात नियमों का पालन कराने के लिए नहीं चलाई जाती। यह अभियान आमतौर पर आपराधिक घटनाओं पर लगाम कसने के उद्देश्य से ही पुलिस चलाती है। जाहिर है ऐसे अभियानों में यातायात नियमों के अनुपालन की जगह मुख्य जोर संदिग्ध लोगों की जांच पड़ताल पर दिया जाता है। ऐसे में वाहन चालक न तो साइड के नियमों का पालन करते हैं और ना ही स्पीड पर ध्यान दिया जाता है। इसका खामियाजा वाहन चलाने वालों से लेकर सड़क से गुजर रहे लोगों को हादसे के रूप में भुगतना पड़ रहा है। यातायात नियमों का अनुपालन नहीं होने से आए दिन वाहन आपस में टकराते रहते हैं और राह चलते लोग वाहनों से रौंदे जाते हैं।

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एनएच 327 ई. पर सड़क किनारे खड़े होते हैं वाहन

बाजार से लेकर एनएच 327 ई पर वाहनों को बेतरतीब खड़ा किया जाना भी हादसों का कारण बन रहा है। एनएच 327 ई. पर बने गोलचक्र के कारण सड़क के बगल पर अतिक्रमण होने से बड़ा वाहनों को जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं दुर्घटना का भी आशंका बना रहता है। सड़क पर दिन रात सड़क को पूरी तरह से घेर कर रिक्सा टेम्पो, साइकिल मोटरसाइकिल ठेला खड़े होते हैं। एनएच के किनारे अतिक्रमण भी सड़क का एक भाग घेर कर रात में ट्रक खड़े होते हैं। बीच सड़क पर खड़े हो रहे ट्रक वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन गए हैं।

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छोटे बच्चे भी चला रहे बाइक

वाहनों को चलाने के लिए 18 साल से कम आयु के बच्चों पर रोक है, लेकिन यहां नियम हर ओर टूट रहे हैं। सड़क पर 13 व 14 साल के बच्चे भी बाइक चलाते दिख जाते हैं। हद तो यह कि 15 साल के बच्चे यहां ऑटो ही नहीं चलाते, बल्कि उसपर यात्रियों को बैठाकर उनके जीवन के साथ भी खिलवाड़ करते नजर आते हैं, लेकिन कम उम्र के ऑटो या बाइक चालकों पर कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। यहां नहीं है यातायात पुलिस की व्यवस्था

इतना ही नहीं रोज रोज हो रहे दुर्घटना के बावजूद इसके इस जिले में अबतक यातायात पुलिस की व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे में यातायात नियंत्रण की भी जिम्मेदारी बिहार पुलिस के जिम्मे ही है। यातायात पुलिस की तैनाती नहीं होना भी सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है।

Posted By: Jagran

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