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कोट

कार्य की प्रगति को लेकर विभागीय स्तर से लगातार मॉनीटरिग की जा रही है। संभावना है कि जून-जुलाई तक में सभी वार्डों को नल जल योजना से आच्छादित कर दिया जाएगा।

विपुल कुमार नंदन,

कार्यपालक अभियंता पीएचईडी।

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जागरण संवाददाता, सुपौल : राज्य सरकार की सात निश्चय योजना में शामिल हर घर नल का जल योजना की स्थिति ऐसी नहीं है कि चालू वित्तीय वर्ष में शत-प्रतिशत वार्डों में नल का जल पहुंचाया जा सके। योजना को प्रारंभ हुए लगभग तीन वित्तीय वर्ष बीतने को है परंतु 78 वार्ड आज भी ऐसे हैं, जहां निविदा पूर्ण नहीं हो सकी है। जहां तक योजनाओं के पूर्ण होने का सवाल है, तो इन तीन वर्ष में सिर्फ 50 वार्ड में ही हर घर नल का जल पहुंचाने में विभाग सफल हो पाया है। 2529 वार्ड वाले सुपौल जिले में 2451 वार्ड में निविदा का कार्य पूर्ण किया जा सका है। इसमें से 50 वार्ड में कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष निविदा वाले वार्ड में कार्य प्रगति पर है। सबसे खराब स्थिति जिले के तटबंध के अंदर बसे 158 वार्ड का है। इन 158 वार्डों में से 80 वार्ड में हाल के दिनों में निविदा पूर्ण हो चुकी है इकरारनामा कर स्थल चयन तो हो गया है लेकिन कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। कुल मिलाकर यदि योजना को पूर्ण करने की यही रफ्तार रही तो वित्तीय वर्ष 2019-20 तक हर घर नल का जल पहुंचना संभव नहीं हो पाएगा और लोगों की शुद्ध पेयजल पीने की आस पूरी नहीं हो पाएगी। दरअसल मुख्यमंत्री के सात निश्चय योजना में शामिल हर घर नल का जल योजना की जब वित्तीय वर्ष 2017-18 में शुरुआत की गई थी तो कहा गया था कि वित्तीय वर्ष 2019-2020 में योजना को शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा। अब जब वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है तो लक्ष्य दूर ही नजर आ रहा है।

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जिले में वित्तीय वर्ष 2017-18 से चालू है योजना

वित्तीय वर्ष 2017-18 में जब योजना चालू की गई तो जिला को 506 वार्ड का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। लक्ष्य के विरुद्ध विभाग ने 287 वार्ड का प्राक्कलन तैयार कर निविदा प्रकाशित किया परंतु निविदा के प्रति संवेदक के उदासीन रवैया के कारण निविदा निस्तारण का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया। इधर सिर्फ 149 वार्ड के लिए निविदा निस्तारण का कार्य संभव हो पाया। इधर विभाग 2017-18 के लक्ष्य को पूरा करने में हांफ ही रहा था कि सरकार ने 2018-19 में जिले को 1012 वार्ड में नल का जल योजना को पूर्ण करने का जिम्मा सौंप दिया। इस वर्ष निविदा निस्तारण दहाई के अंकों में भी नहीं पहुंच पाया। इधर चालू वित्तीय वर्ष में निविदा निस्तारण के कार्यों में तेजी आई। परिणाम रहा कि 2451 वार्ड में निविदा निस्तारण के कार्यों को पूर्ण कर अभी तक में 50 वार्ड में कार्य को पूरा किया जा सका है।

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तटबंध के अंदर बसे शत-प्रतिशत वार्ड की नहीं हो सकी निविदा

विभागीय जानकारी के मुताबिक जिला अंतर्गत तटबंध के अंदर कुल 158 वार्ड हैं। इसमें से 80 वार्ड में ही निविदा निस्तारण का कार्य संभव हो पाया है। शेष बचे 78 वार्ड में पुन: निविदा की जा रही है। बताते चलें कि तटबंध के अंदर हर घर नल का जल पहुंचाने वाले संयंत्र सोलर प्लेट से संचालित होंगे। बाकी वार्डों में यह संयंत्र विद्युत द्वारा संचालित होगा। विभाग का मानना है कि तटबंध के अंदर बसे गांव में बिजली आपूर्ति नहीं होने के कारण इसका प्राक्कलन अलग से तैयार कर निविदा निस्तारण किया गया है।

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क्या है यह योजना

दरअसल सरकार ने शुद्ध पेयजल घर-घर पहुंचाने के उद्देश्य से इस योजना को सात निश्चय योजना में शामिल कर कार्य प्रारंभ किया। इसके तहत प्रत्येक वार्ड में करीब 48 लाख की लागत से जलापूर्ति संयंत्र स्थापित किया जाना है। इस संयंत्र से पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।

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प्रखंडवार पूर्ण किया गया कार्य

प्रखंड का नाम----पूर्ण नल जल योजना से आच्छादित वार्डों की संख्या

राघोपुर------------------10

किशनपुर---------------10

सरायगढ़----------------30

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दावे से इतर हाल

सरायगढ़ के 30 वार्डों को नल का जल से आच्छादित बताया गया है लेकिन जमीन पर हाल दावे से इतर है। इस प्रखंड क्षेत्र में एक लाख 22 हजार से अधिक आबादी को नल-जल योजना से पीने का पानी मिलना है। प्रखंड के 157 वार्ड में बसी आबादी इस इंतजार में हैं कि कब नल-जल योजना से शुद्ध पेयजल नसीब होगा।

अभी तक एक भी घर में नल से जल उपलब्ध नहीं हो सका है। कहीं मशीन खराब पड़ी है तो कहीं आधा-अधूरा कार्य कर संवेदक आराम फरमा रहे हैं। प्रखंड के चांदपीपर गांव में सबसे पहले नल-जल योजना की शुरुआत की गई लेकिन वहां के एक भी लोग इसका लाभ अब तक नहीं ले सके। उधर अन्य पंचायतों में भी नल-जल योजना एक तरह से दिखावा बनती जा रही है। कुछ ही जगह ऐसे हैं जहां पानी टंकी बनकर तैयार है। बाकी जगहों पर तो कहीं पाइप है तो टंकी नहीं लगी और कहीं टंकी लगाई गई तो पाइप ही नहीं है। आलम यह है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरायगढ़-भपटियाही में भी मरीज चापाकल का पानी पीने को विवश हैं।

Posted By: Jagran

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