संवाद सूत्र, राघोपुर(सुपौल): राम का दर्शन करना है तो कीजिए। सबरी के जूठे बेर में, गरीबों की दर्द में, जरूरतमंद की मुसीबतों में, फूलों की सुंदरता व खुशबू में, बेगुनाहों, कन्याएं, माताएं और बहनों की अस्मत में हमारे राम हमारे आसपास ही हैं। उनके दर्शन के लिए दिव्य दृष्टि चाहिए। यह दर्शन संत के सत्संग से देव ग्रंथों के अध्ययन से स्वच्छ और शुद्ध आत्मा में तथा निस्वार्थ कर्म से ही संभव है। उक्त बातें पिपराही पंचायत के दुर्गापुर गांव में दुर्गा मंदिर के प्रांगण में चल रहे नौ दिवसीय रामकथा सह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को ऋषिकेश से पधारे ब्रह्मचारी संत गोविद दास जी महाराज ने कही। कहा कि अपने आप को संसार का मानोगे तो संसार का भजन होगा। भगवान का नहीं, अपने आप को भगवान का मानो। मैं केवल भगवान का हूं भगवान ही मेरे अपने हैं। यही वास्तविकता और यही हमें कथा सिखाती है। कथा में गुरु महिमा, गुरु वंदना, सीता मैया की जन्म की कथा पर विस्तारपूर्वक श्रद्धालुओं को बताया गया। कहा कि कोई काम करो, कहीं जाओ भगवान को अवश्य याद कर लो। भगवान को याद करने मात्र से मनुष्य संसार बंधन से छूट जाता है। भगवान को याद करने से उनकी कृपा से सब काम सिद्ध होते हैं। भगवान को याद रखने से विजय और भूल जाने से पराजय होती है। रामकथा सुनने को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

Posted By: Jagran

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