संवाद सहयोगी, त्रिवेणीगंज (सुपौल): सिचाई की चरमराई व्यवस्था की पोल खोलने के लिए डपरखा कालोनी होकर गुजरने वाली मुरलीगंज शाखा नहर से लक्ष्मीनियां की ओर निकलने वाली ग्रामीण भीसी की तस्वीर काफी है। सिचाई विभाग की उदासीनता का आलम यह है कि कई वर्षों से इस भीसी में पानी नहीं आता है। साफ-सफाई नहीं होने के कारण यह जंगल में तब्दील हो गया। इसी को लेकर बुधवार को डपरखा के ग्रामीणों ने सिचाई विभाग के विरुद्ध प्रदर्शन किया।

दरअसल, किसानों को सिचाई मुहैया कराने वाली यह ग्रामीण भीसी बस शोभा की वस्तु है। किसानों का आरोप है कि धान की रोपाई और सिचाई के इस मौसम में पानी न आना किसानों के साथ धोखा है। किसान सिचाई न कर पाने से बेहद दुखी हैं। मालूम हो कि यह भीसी डपरखा, मयूरवा, लक्ष्मीनियां आदि गांवों के किसानों के लिए सिचाई के दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण है। पानी नहीं रहने से किसान पंपसेट से सिचाई करने पर मजबूर हैं। ग्रामीण गोसाई यादव, अनमोल यादव, सुक्कन यादव, धनेश्वर यादव, कमलेश्वरी यादव, लाल यादव, बंदे लाल यादव, सिकेंद्र यादव, जनार्दन यादव, नारायण यादव, कैलू यादव, छुतहरू यादव, जयकृष्ण यादव आदि ने बताया कि धान रोपनी के समय में भीसी में पानी नहीं रहने से हमलोगों को पंपसेट से डीजल की बढ़ती कीमत के बावजूद सिचाई करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारी से भीसी की सफाई कर पानी छोड़ने की मांग की है। इस बाबत

सिचाई विभाग के कनीय अभियंता ने बताया कि अभी बड़ी नहर में पानी का दबाव अधिक रहने के कारण पहले बड़ी नहर को देखा जा रहा है। बाद में छोटी नहर को देखा जाएगा।

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