-कोर्स संचालन करने को लेकर शिक्षकों को दी गई है ट्रेनिग

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जागरण संवाददाता, सुपौल: बेशक सरकार स्कूलों में शैक्षणिक माहौल को बेहतर करने के प्रति गंभीर दिख रही है। इसके लिए सबकी जिम्मेवारी भी तय की गई है। हाल के दिनों में जिलाधिकारी को भी स्कूलों का मुआयना करने को कहा गया है। बेहतर शिक्षण व्यवस्था को ले विभागीय आदेश निर्देश भी जारी होते रहे हैं। परंतु इन आदेशों का पालन कितना हो पा रहा है इसे देखने की फुर्सत शायद किसी के पास नहीं है। दरअसल कोरोना संक्रमण के बाद जब विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को फिर से चालू किया गया तो विभाग ने कक्षा दो से बारहवीं तक के बच्चों के लिए कैच अप कोर्स संचालित करने का निर्देश दिया। ताकि संक्रमण के कारण छूटे सिलेबस को पूरा किया जा सके। परंतु बच्चों के सिलेबस को पूरा करने वाला यह कैच अप कोर्स सिर्फ कागजों पर ही संचालित हो रहा है। जागरण द्वारा किए गए पड़ताल में पाया गया कि बच्चों के लिए संचालित यह कोर्स सिर्फ कागजों में पूरा किया जा रहा है । स्थिति ऐसी है कि कई प्रधान को इस कोर्स के बारे में पता तक भी नहीं है। ऐसे में बच्चों का छूटा कोर्स पूरा हो पाएगा फिलहाल जिले में होता नहीं दिख रहा है.। जबकि कोर्स को संचालित करने के लिए विभाग ने न सिर्फ निर्देश दे रखा है बल्कि इससे संबंधित सामग्री तैयार कर स्कूल को उपलब्ध कराई है। इस कोर्स को संचालन करने को लेकर शिक्षकों को ट्रेनिग भी दी गई है। बावजूद जिले के अधिकांश विद्यालयों में यह कोर्स संचालित नहीं हो पा रहा है। -------------------------------------

बच्चों को हुए नुकसान की भरपाई है कैच अप कोर्स कोरोना संक्रमण के कारण 2 वर्षों में कई महीनों तक स्कूल बंद रहे थे। जिसमें छात्रों को लर्निंग लॉस हुआ था। इस लर्निंग लॉस की समस्या को दूर करने के लिए ही सरकार और विभाग ने कैच अप कोर्स संचालित करने का निर्णय लिया। जिसके तहत बच्चों को 3 माह के अंदर छूटे सिलेबस को पूरा करना था। कई प्रधान को इस बात का पता तक भी नहीं है कि उन्हें कैच अप कोर्स चलाना है। कई प्रधानों ने बताया कि यहां तो सामान्य कक्षा चलाने के लिए शिक्षक है नहीं फिर कैच अप कोर्स चलाना कैसे संभव होगा।

Edited By: Jagran