जेल से बाहर निकलकर मुख्यधारा से जुड़ेंगे बंदी, सुपौल में RSETI की मदद से सीख रहे अगरबत्ती बनाने का हुनर
सुपौल मंडल कारा में आरसेटी द्वारा 35 बंदियों के लिए 12 दिवसीय अगरबत्ती निर्माण प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसका ...और पढ़ें

जेल से बाहर निकलकर मुख्यधारा से जुड़ेंगे बंदी
HighLights
35 बंदियों के लिए 12 दिवसीय अगरबत्ती निर्माण प्रशिक्षण।
आरसेटी द्वारा सुपौल मंडल कारा में कार्यक्रम का शुभारंभ।
बंदियों को स्वरोजगार से जोड़कर मुख्यधारा में लाना उद्देश्य।
जागरण संवाददाता, सुपौल। मरीचा स्थित भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के तत्वावधान में मंडल कारा, सुपौल में 35 बंदियों के लिए 12 दिवसीय घरेलू अगरबत्ती निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मंडल कारा अधीक्षक मोतीलाल एवं आरसेटी निदेशक टीएस केरकेट्टा ने दीप प्रज्वलित कर किया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को कौशल विकास के माध्यम से स्वरोजगार के लिए तैयार करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। 12 दिनों तक चलने वाले प्रशिक्षण में अगरबत्ती निर्माण की पूरी प्रक्रिया के साथ कच्चे माल, उत्पादन, गुणवत्ता, पैकेजिंग, बाजार व्यवस्था और व्यवसाय शुरू करने से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान ईडीपी प्रशिक्षक सह कार्यक्रम समन्वयक अनीश रंजन प्रशिक्षणार्थियों को उद्यमिता एवं व्यवसाय संचालन की बारीकियों से अवगत कराएंगे।
हुनर और सकारात्मक सोच भी होनी चाहिए
मंडल कारा अधीक्षक ने कहा कि आरसेटी की ओर से बंदियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता रहा है। ऐसे कार्यक्रम बंदियों में नई उम्मीद और आत्मविश्वास पैदा करने में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि कारागार में रहने के बाद बंदी जब बाहर निकलें तो उनके पास सजा पूरी करने के साथ कोई हुनर और सकारात्मक सोच भी होनी चाहिए।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से पूरे अनुशासन एवं गंभीरता के साथ प्रशिक्षण लेने और सीखे गए हुनर का भविष्य में सकारात्मक उपयोग करने की अपील की। आरसेटी निदेशक ने कहा कि संस्थान गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के साथ प्रशिक्षुओं को स्वरोजगार के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्वरोजगार स्थापित करने में आवश्यक सहयोग
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद भी आरसेटी दो वर्षों तक प्रशिक्षुओं से जुड़कर स्वरोजगार स्थापित करने में आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करती है।उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए अनुशासन बेहद जरूरी है। प्रशिक्षणार्थी यदि अनुशासन के साथ हुनर सीखते हैं और उसका सही तरीके से उपयोग करते हैं तो उनके लिए स्वरोजगार की राह आसान हो सकती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रशिक्षण बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बंदी कल्याण पदाधिकारी राकेश कुमार गियर ने प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें समाज में अपनी अलग पहचान और मिसाल कायम करने के लिए प्रेरित किया।
वहीं कार्यक्रम समन्वयक सह ईडीपी प्रशिक्षक ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान व्यवसायिक ज्ञान और तकनीकी कौशल के साथ व्यावहारिक ज्ञान पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
