पूर्णिया। ठंड के बढ़ते प्रकोप के साथ शहर में सुरक्षा व्यवस्था लचर हो गई है। बदमाश ठंड के दिनों में छिनतई और झपट्टामार गिरोह की घटना को लगातार अंजाम दे रहे है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों सक्रिय बदमाश गिरोह के सदस्य सरेराह आम जनता से छिनतई और झपट्टा मारकर लोगों को लूट रहे है। वहीं पुलिस की निष्क्रियता को लोग कोस रहे हैं। लोग अब घर से लेकर बाहर तक सुरक्षित नहीं हैं। सोमवार की शाम से लेकर रात तक बदमाशों ने सहायक खजांची थाना क्षेत्र के खीरू चौक और आरएनसाह चौक पर दो लोगों का मोबाइल झपट्टामार लिया। बदमाशों ने पहले खीरू चौक पर साइकिल से जा रहे ततमा टोली निवासी सुरेश कुमार का मोबाइल फोन झपट्टा मारा। उसके बाद आरएनसाह चौक स्थित ट्रैफिक थाना के पीछे शारदा नगर निवासी मनोज कुमार का मोबाइल झपट्टा मार लिया। मनोज कुमार ने बताया कि वे मोबाइल से बात करते हुए पैदल टैक्सी स्टैंड से आरएनसाह चौक की ओर जा रहे थे। पीछे से एक बाइक सवार दो बदमाश आये और मोबाइल झपट्टा मारकर बस स्टैंड की ओर फरार हो गए। ऐसे झपट्टामार गिरोह की सक्रियता पर अंकुश लगाने में पुलिस विफल साबित हो रही है। ऐसे में आम लोगों को सुरक्षा की ¨चता बढ़ती जा रही है कि आखिर किस प्रकार अपने आपको सुरक्षित रखा जा सके। शहर के सबसे सघन बाजार सहायक खजांची थाना क्षेत्र के भट्ठा बाजार, जिला स्कूल रोड़, आरएनसाह चौक जैसे जगहों पर झपट्टामार गिरोह खुलेआम सक्रिय है। जहां-तहां झपट्टामारी और छिनतई की घटना को अंजाम दे रहे है। इन क्षेत्रों में पुलिस कहीं भी दिखती तक नहीं है। घटना के बाद शिकायत करने पर भी पुलिस एक्शन में नहीं आती है। ऐसे में लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।

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बदमाश हाई स्पीड बाइक का करते हैं उपयोग

झपट्टमार और छिनतई गिरोह के सदस्य बिना नंबर के हाई स्पीड वाले बाइक का उपयोग करते है। तेज रफ्तार वाले बाइक वाले बदमाश एक के बाद एक छिनतई और झपट्टामार की घटना को अंजाम दे रहे है। ऐसे बाइक वालों पर पुलिस की नजर पड़ती भी है तो पकड़कर कुछ ले-दे कर ऑन द स्पॉट मामले को रफा-दफा कर देती है। पुलिस कुछ लेते ही ऐसे बाइक सवार बदमाशों से गाड़ी के कागजात और कुछ पूछताछ करना तक मुनासिब नहीं समझती हैं। पुलिस वालों की करतूत के कारण बदमाशों का मनोबल दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहा है।

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सड़क पर अपने काम से ही निकलती पुलिस

पुलिस अपने थाना क्षेत्र में गश्ती करने में भी कोताही बरत रही है। सड़क और चौक-चौराहे पर पुलिस ना के बराबर दिखती है। अगर दिखती भी है तो अपने किसी काम से ही। पुलिस की गाड़ी चाय-पान और किराना दुकान पर ही लगी दिखती है। मानो पुलिस सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति कर अपने काम को तवज्जो देती है। पुलिस की लचर सुरक्षा व्यवस्था का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है कि सरेराह झपट्टामारी और लूट की घटना घट रही है। हालत यह है कि शाम ढलते ही जहां सड़कें सूनी हो जाती है वहीं पुलिस भी गायब हो जाती है। कहीं भी पुलिस की गश्त दिखाई नहीं देती। सहायक खजांची पुलिस शाम ढलते ही गायब हो जाती है।

Posted By: Jagran

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