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सुपौल: किशनपुर में कोसी नदी का भीषण कटाव जारी, पंचगछिया गांव पर मंडराया विस्थापन का खतरा

Published: Sat, 12 Sep 2026 06:40 PM (IST)

किशनपुर के पंचगछिया गांव में कोसी नदी का भीषण कटाव लगातार जारी है, जिससे ग्रामीणों में दहशत और विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है।

कोसी नदी का भीषण कटाव जारी

कोसी नदी का भीषण कटाव जारी

HighLights

  1. किशनपुर के पंचगछिया गांव में कोसी नदी का भीषण कटाव जारी है।

  2. ग्रामीणों में दहशत, घर-जमीन बचाने की चिंता, विस्थापन का खतरा मंडराया।

  3. प्रशासन से तत्काल कटावरोधी उपाय और बचाव कार्य शुरू करने की मांग।

संवाद सूत्र, किशनपुर (सुपौल)। प्रखंड क्षेत्र की मौजहा पंचायत स्थित पंचगछिया गांव के वार्ड संख्या 13 और 14 में कोसी नदी का भीषण कटाव लगातार जारी है। नदी की तेज धारा के कारण कटाव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। लोगों को अपने घर, जमीन, फसल और परिवार की सुरक्षा की चिंता सता रही है। 

ग्रामीण राजेश मंडल ने बताया कि कोसी नदी लगातार जमीन को काट रही है। यदि कटाव की रफ्तार नहीं थमी तो कई परिवारों के सामने अपने घर बचाने का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कटाव स्थल का निरीक्षण कराकर बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की। 

स्थिति हो सकती है और गंभीर

बिनोद यादव ने बताया कि कटाव के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। वर्षों से बसे घर और खेती योग्य जमीन नदी की जद में आने का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। 

वहीं संतोष कुमार ने कहा कि कटाव प्रभावित क्षेत्र में बांस पाइलिंग, जियो बैग सहित अन्य कटावरोधी उपाय तत्काल किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से समय रहते कार्रवाई होने पर ही गांव और आबादी को सुरक्षित रखा जा सकता है।

विस्थापन की चिंता में कई परिवार

लच्छो यादव ने कहा कि लगातार हो रहे कटाव के कारण कई परिवार विस्थापन की चिंता में हैं। प्रशासन को प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के साथ-साथ संभावित विस्थापितों के लिए भी उचित व्यवस्था करनी चाहिए। 

ग्रामीणों ने प्रखंड एवं जिला प्रशासन से तत्काल कटाव स्थल का निरीक्षण कराकर युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने बांस पाइलिंग, जियो बैग सहित अन्य आवश्यक उपाय कर कोसी नदी की धारा से गांव और आबादी को बचाने की गुहार लगाई है।

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