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कोसी नदी के कटाव से बेघर हुए 200 से ज्यादा परिवार, खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर लोग

Published: Tue, 22 Sep 2026 03:02 PM (IST)

कोसी नदी के कटाव से सुपौल के किशनपुर प्रखंड में 200 से अधिक परिवार बेघर हो गए हैं, जो खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

बेघर हुए 200 से ज्यादा परिवार

बेघर हुए 200 से ज्यादा परिवार

HighLights

  1. किशनपुर में कोसी नदी के कटाव से 200 से अधिक परिवार विस्थापित।

  2. बेघर हुए परिवार खुले आसमान के नीचे, भोजन-आश्रय की समस्या।

  3. पूर्व प्रमुख ने तत्काल प्लास्टिक, राशन, कटावरोधी कार्य की मांग की।

संवाद सूत्र, किशनपुर (सुपौल)। कोसी नदी में पानी घटे या बढ़े, तटबंध के अंदर बसे लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जलस्तर बढ़ने पर जहां लोगों को आवागमन, भोजन, पेयजल और पशुचारे की समस्या से जूझना पड़ता है, वहीं पानी घटते ही नदी का कटाव तेज हो जाता है। 

कटाव की चपेट में आकर वर्षों से बसे परिवारों को अपना घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ रहा है। वर्तमान में मौजहा पंचायत के बेला, सिसवा, पंचगछिया और सुजानपुर गांव में कोसी नदी का कटाव जारी है। अब तक दो सौ से अधिक परिवार विस्थापित होकर इधर-उधर चले गए हैं। 

आशियाना उजाड़कर सुरक्षित स्थान की तलाश में निकल रहे

वहीं प्रतिदिन दर्जनों परिवार अपना आशियाना उजाड़कर सुरक्षित स्थान की तलाश में निकल रहे हैं। विस्थापित परिवारों के सामने सिर छिपाने, भोजन और बच्चों की देखभाल की गंभीर समस्या बनी हुई है। 

ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक सप्ताह पूर्व विस्थापित हुए कुछ परिवारों को प्रशासन की ओर से प्लास्टिक उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद विस्थापित हुए कई परिवारों को अब तक प्लास्टिक नहीं मिल पाया है। ऐसे परिवार बारिश, आंधी-तूफान और रात के अंधेरे में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। 

मजदूर वर्ग के इन परिवारों के लिए दोबारा घर बनाकर बसना आसान नहीं है। एक बार विस्थापित होने के बाद परिवारों को फिर से अपना आशियाना खड़ा करने में वर्षों लग जाते हैं।

पूर्व प्रमुख ने प्रशासन से की तत्काल मदद की मांग

पूर्व प्रमुख सूर्यनारायण प्रसाद ने कहा कि कोसी नदी ने पहले दुबियाही पंचायत के बेलागोठ गांव को लगभग पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। अब मौजहा पंचायत के बेला, सिसवा, पंचगछिया और सुजानपुर गांव में कटाव का कहर जारी है। इन इलाकों से अब तक दो सौ से अधिक परिवार विस्थापित हो चुके हैं और प्रतिदिन दर्जनों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि जिन विस्थापित परिवारों को अब तक प्लास्टिक नहीं मिला है, उन्हें अविलंब प्लास्टिक उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के बीच तत्काल सूखा राशन वितरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कटाव स्थल पर प्रभावी तरीके से कटावरोधी कार्य कराने की मांग की, ताकि अभी बचे घरों को सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे समय-समय पर प्रखंड स्तर के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं।

नौआबाखर के सिसवा में भी घर-आंगन में पानी

नौआबाखर पंचायत के सिसवा गांव में भी तटबंध के अंदर दोनों नदियों के बीच बसे लोगों के घर-आंगन में पानी लगा हुआ है। यहां भी प्रभावित परिवारों को प्लास्टिक के साथ सूखा राशन उपलब्ध कराने की जरूरत है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ और कटाव की दोहरी मार झेल रहे परिवारों को तत्काल राहत नहीं मिली तो उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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