नेपाल सीमा से गांजे की तस्करी बनी चुनौती: कोसी में ट्यूब से आ रही थी खेप, 15 दिनों में पकड़ा गया 629 किग्रा गांजा
भारत-नेपाल सीमा से सुपौल जिले में गांजे की तस्करी एक गंभीर चुनौती बन गई है, जिसकी मुख्य वजह इसकी सस्ती उपलब्धता और बढ़ती मांग है।

कोसी में ट्यूब से आ रही थी खेप (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
जागरण संवाददाता, सुपौल। सस्ता, सहज उपलब्धता और लगातार बढ़ती मांग। इन तीन वजहों ने गांजे के अवैध कारोबार को कोसी क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बना दिया है। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे सुपौल जिले में गांजे की लगातार हो रही बरामदगी इस अवैध कारोबार के विस्तार की ओर संकेत करती है।
इस साल के सितंबर से लेकर अबतक यानि ढाई माह के दौरान सुपौल जिले में पुलिस और एसएसबी ने कुल 2,186.55 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।
15 दिनों में 629.25 किलोग्राम गांजा बरामद
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में 842 किलोग्राम, सितंबर में 715.30 किलोग्राम और अक्टूबर के शुरुआती 15 दिनों में 629.25 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की जब्ती तस्करी के पैमाने और सुरक्षा एजेंसियों के सामने मौजूद चुनौती को उजागर करती है।
पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की कार्रवाई के बावजूद तस्कर गांजे की खेप पहुंचाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में पुलिस और एसएसबी के सामने बड़ी चुनौती है और चुनौती केवल गांजे की खेप बरामद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी आपूर्ति से लेकर बिक्री तक सक्रिय पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की है।
बलुआ बाजार में मिली थी सबसे बड़ी खेप
गांजा तस्करी के बड़े मामलों में पिछले वर्ष जुलाई में बलुआ बाजार थाना क्षेत्र से 1,718.5 किलोग्राम गांजे की बरामदगी प्रमुख है। इसे जिले में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी बताया जा रहा है। एक ही स्थान से इतनी बड़ी मात्रा में गांजे की जब्ती तस्करी के व्यापक पैमाने की ओर संकेत करती है।
भारत-नेपाल सीमा की भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए कई तरह की चुनौतियां पेश करती हैं। सीमा से सटे इलाकों में विभिन्न रास्तों, नदी की धाराओं और दूरस्थ क्षेत्रों का इस्तेमाल कर तस्कर निगरानी से बचने की कोशिश करते हैं।
तस्करी के ऐसे ही एक प्रयास का मामला 29 सितंबर को सामने आया था। सीमा चौकी नरपतपट्टी के एसएसबी जवानों ने कोसी नदी की धारा में ट्यूब के सहारे बहकर आ रहे संदिग्ध सामान को देखा। जवानों ने रस्सी की मदद से सामान को बाहर निकाला तो उसमें से 400 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ।
सस्ता नशा होने से बढ़ रही मांग
गांजे को अपेक्षाकृत सस्ते नशीले पदार्थों में गिना जाता है। कम कीमत में इसकी छोटी मात्रा उपलब्ध हो जाने से सीमित आय वाले लोगों के लिए भी इसकी खरीद आसान हो जाती है। यही वजह है कि इसकी मांग का फायदा उठाकर तस्कर अवैध कारोबार को बढ़ावा देने की कोशिश करते हैं।
भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अवैध गतिविधियों की रोकथाम के उद्देश्य से पिछले माह भीमनगर चेकपोस्ट पर दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच द्विपक्षीय समन्वय बैठक आयोजित की गई थी। बैठक का उद्देश्य सीमा पर आपसी तालमेल मजबूत करना और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सहयोग बढ़ाना था।
सीमा पार से होने वाली तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए इस तरह का समन्वय महत्वपूर्ण है। हालांकि, बैठकों में तय बिंदुओं को धरातल पर लागू करना भी उतना ही आवश्यक है।
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