कोसी का पानी चमकाएगा सीमांचल की तकदीर, 4 जिलों को मिलेगा लाभ; CM ने दिए तेजी से काम के निर्देश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुपौल में कोसी-मेची लिंक परियोजना का निरीक्षण किया, जिससे सीमांचल के 2.14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि ...और पढ़ें

कोसी का पानी चमकाएगा सीमांचल की तकदीर, 4 जिलों को मिलेगा लाभ; CM ने दिए तेजी से काम के निर्देश
HighLights
मुख्यमंत्री ने कोसी-मेची लिंक परियोजना स्थल का निरीक्षण किया।
2.14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलेगी।
परियोजना मार्च 2029 तक पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित है।
जागरण संवाददाता, सुपौल। कोसी-मेची अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजना के पूरा होने से सीमांचल के किसानों को सिंचाई की बड़ी सुविधा होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड अंतर्गत चैनपुर गांव में निर्माणाधीन कोसी-मेची अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजना स्थल का निरीक्षण किया।
उन्होंने परियोजना की प्रगति, निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति और कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया।
परियोजना के पूर्ण होने पर कुल 2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त एवं सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने का दावा किया गया है। इसमें अररिया की 69,642 हेक्टेयर, पूर्णिया की 69,970 हेक्टेयर, किशनगंज की 39,548 हेक्टेयर तथा कटिहार की 35,653 हेक्टेयर कृषि भूमि शामिल है।
परियोजना के तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर की जल संवहन क्षमता को 15 हजार क्यूसेक से बढ़ाकर 20 हजार क्यूसेक किया जाएगा।
मुख्य नहर के विस्तार के साथ चार शाखा नहर, छह वितरणी तथा आवश्यक नहर प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के अंतिम छोर पर करीब 950 क्यूसेक पानी मेची नदी में प्रवाहित होगा। इसके माध्यम से कोसी के अधिशेष जल को मेची नदी तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
परियोजना की अनुमानित लागत 6,282.32 करोड़ रुपये बताई गई है और इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। केंद्र सरकार ने परियोजना के शेष कार्यों के लिए 6,143.22 करोड़ रुपये की लागत के विरुद्ध 3,652.56 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता भी स्वीकृत की है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य के दौरान किसानों के कृषि कार्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने परियोजना से जुड़े कार्यों की लगातार निगरानी करने तथा गति, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी के अधिशेष जल का समुचित उपयोग कर सीमांचल के खेतों तक पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कोसी और गंडक नदियों को व्यवस्थित एवं सुव्यवस्थित करने के लिए समग्र योजना तैयार करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने ऐसी जल संरचनाएं विकसित करने पर जोर दिया, जिससे छोटी नदियों में भी वर्षभर पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रह सके। साथ ही जल संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और समुचित उपयोग के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी-मेची अंतरराज्यीय नदी लिंक परियोजना बिहार के सीमांचल के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। इससे सिंचाई सुविधा के विस्तार के साथ बाढ़ प्रबंधन और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी सहायता मिलेगी। परियोजना के माध्यम से कोसी नदी के अतिरिक्त जल को लिंक नहर के जरिए मेची नदी तक पहुंचाया जाएगा। इससे महानंदा बेसिन में जल की उपलब्धता बढ़ाने और कोसी के बाढ़ प्रभाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्थल निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री चैनपुर गांव स्थित परियोजना के कैंप कार्यालय पहुंचे, जहां परियोजना की समीक्षा बैठक हुई। जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कार्य प्रगति की जानकारी दी। जिलाधिकारी सावन कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से निर्माण कार्यों की स्थिति और परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
मौके पर उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, विधायक नीरज कुमार बबलू, विधायक रामविलास कामत, विधायक देवती यादव, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक शैशव यादव समेत विभागीय अधिकारी और अभियंतागण उपस्थित थे।
एक नजर में
- परियोजना से 2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य।
- अररिया में 69,642, पूर्णिया में 69,970, किशनगंज में 39,548 और कटिहार में 35,653 हेक्टेयर क्षेत्र लाभान्वित होगा।
- पूर्वी कोसी मुख्य नहर की क्षमता 15 हजार से बढ़ाकर 20 हजार क्यूसेक की जाएगी।
- चार शाखा नहर और छह वितरणियों का होगा निर्माण।
- करीब 950 क्यूसेक पानी मेची नदी में पहुंचाने की योजना।
- परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य।
- केंद्र ने शेष कार्यों के लिए 3,652.56 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की है।
