सुपौल। चालू खरीफ विपणन 2020-21 में जिले की 35 पंचायतों के किसानों को इस बार अपनी पंचायतों में धान बेचने की हसरत पूरी नहीं हो पाएगी। ऐसे किसानों को धान बेचने के लिए बगल के पंचायत के पैक्सों पर निर्भर रहना होगा। इसके पीछे मुख्य वजह है कि जिले में 35 ऐसे पैक्स हैं जिनका कार्यकाल अगस्त में ही समाप्त हो चुका है। परंतु कोरोना संक्रमण के कारण इन पैक्सों का चुनाव संभव नहीं हो पाया है। धान अधिप्राप्ति के लिए जारी अधिसूचना के मुताबिक ऐसे 35 पैक्सों को इस बार धान अधिप्राप्ति से वंचित रहना होगा तथा इन पंचायत के किसानों को सरकारी दर पर धान बेचने के लिए बगल के पैक्सों से जोड़ा जाएगा। ऐसे में इन पंचायतों के किसान के इस व्यवस्था का लाभ उठा पाएंगे फिलहाल यह संभव होते नहीं दिख रहा है। वैसे भी सरकार की इस व्यवस्था का लाभ अधिकांश किसान नहीं उठा पाते हैं। अधिप्राप्ति के लिए जब तक विभाग तैयारी को अंतिम रूप देता है तब तक छोटे और मझोले किसान धान ओने-पौने दाम पर बेच दिए होते हैं। पिछले वर्ष के आंकड़ें को देखें तो जितने किसानों ने धान अधिप्राप्ति के लिए अपना ऑनलाइन पंजीयन कराया उसमें से महज 45 फीसद किसान ही धान सरकारी दर पर बेच पाए थे जबकि किसानों की कुल आबादी का महज चार फीसद किसान ही धान बेचने के लिए पंजीयन कराए थे। ऐसा भी नहीं कि जिन पंचायतों के पैक्स धान अधिप्राप्ति में जुटे थे वहां के सभी किसान इस व्यवस्था का लाभ उठा पाए थे। अब जबकि 35 पंचायत के किसानों को नजदीक के पैक्सों से जोड़ा जाएगा और वे वहां जाकर धान बेच पाएंगे यह फिलहाल संभव होता नहीं दिख रहा है। एक तो अन्य पंचायत में धान बेचने के लिए उन्हें वाहन खर्च अधिक पड़ेगा और फिर समय भी अधिक लगेगा। किसानों की मानें तो विभाग द्वारा दूसरे पैक्स से टैग करने के बाद वहां के अध्यक्ष दूसरी पंचायत के किसानों की धान लेने में दिलचस्पी भी नहीं दिखाते हैं। जिसके कारण धान बेचने के लिए उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में सरकारी लक्ष्य समय से प्राप्त हो जाएगा और किसानों को लाभ मिल पाएगा फिलहाल यह संभव होते नहीं दिख रहा है। तैयारी में जुटा विभाग सहकारिता विभाग दर और लक्ष्य मिलते ही खरीद की तैयारी में जुट चुका है। प्रथम पेज में 131 क्रय समितियों को धान अधिप्राप्ति के लिए चिह्नित किया गया है जिसमें 124 पैक्स तथा सात व्यापार मंडल को शामिल किया गया है। विभाग का मानना है कि जिला पदाधिकारी के अनुमोदन उपरांत इन क्रय समितियों को जल्द से जल्द सीसी करा कर किसानों से धान अधिप्राप्ति को ले आदेश पारित किया जाएगा। बताया कि धान अधिप्राप्ति प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी रखा जाएगा और 48 घंटे के अंदर किसानों के खाते में धान की कीमत की राशि स्थानांतरित कर दी जाएगी।

बटाईदार खेती करने वाले किसानों का भी होगा निबंधन जिले में वैसे किसान भी हैं जो अपनी भूमि पर खेती नहीं करते हैं। ऐसे किसानों का भी निबंधन किया जाएगा। इस प्रकार के किसान अपने किसान सलाहकार या वार्ड सदस्य दूसरे की जमीन पर खेती करने का प्रमाण पत्र प्राप्त करेंगे यह इसके आधार पर ऑनलाइन पंजीकरण कराकर अधिकतम 75 क्विटल धान की बिक्री कर सकेंगे। वहीं सामान्य किसान स्व अभिप्रमाणित प्रमाण पत्र के माध्यम से दो सौ क्विटल तक धान की बिक्री कर सकेंगे।

कोरोना से बचाव के लिए बरतनी होगी सावधानी धान क्रय केंद्रों पर कोरोना से बचाव को लेकर सावधानी बरतनी होगी। महत्वपूर्ण सूचना बैनर या दीवार पर लिखना जरूरी होगा। किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था व धान के भंडारण की व्यवस्था आवश्यक होगी। साबुन पानी व सैनिटाइजर की व्यवस्था के साथ इस कार्यों में शामिल कर्मी व पदाधिकारियों को मास्क पहनना जरूरी होगा साथ ही केंद्र के आसपास खुले स्थान का होना आवश्यक होगा।

Indian T20 League

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

kumbh-mela-2021