2026 का पहला चंद्र ग्रहण इस दिन लगेगा, आचार्य ने बताई सटीक टाइमिंग; जरूर करें ये काम
आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र के अनुसार, 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। यह शाम 5:50 बजे शुरू ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, करजाईन बाजार (सुपौल)। फाल्गुन पूर्णिमा को इस बार चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan Kab Lagega 2026) का योग बना है। ग्रहण का योग खंडग्रास है। 3 मार्च यानि मंगलवार को स्पर्श सायंकाल में 5 बजकर 50 मिनट से शुरू होगा एवं 6 बजकर 46 मिनट (Chandra Grahan Timing) पर मोक्ष है।
चंद्र ग्रहण के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए आचार्य पंडित धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को लगता है। पृथ्वी जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरते हैं तभी चंद्र ग्रहण लगता है।
चंद्रमा अपने भ्रमण पथ पर चलते हुए जब पृथ्वी की उपच्छाया में पहुंचते हैं तब विशेष परिवर्तन नहीं होता है पर ज्योंही प्रछाया के समीप आ जाते हैं तब उन पर ग्रहण प्रतीत होने लगता है। जब उनका संपूर्ण मंडल प्रछाया के भीतर आ जाते हैं तब पूर्ण चंद्र ग्रहण अथवा पूर्ण ग्रास चंद्र ग्रहण लगता है।
वहीं, पौराणिक श्रुति का जिक्र करते हुए आचार्य ने कहा कि राहु नामक एक दैत्य चंद्र ग्रहण काल में ही पृथ्वी की छाया में प्रवेश कर चंद्रमा को पीड़ा पहुंचाता है, इसलिए यह राहुकृत ग्रहण भी कहलाता है। इस काल में स्नान, दान, जप, होम आदि अनुष्ठान कर्म करने से राहुग्रह कृत पीड़ा दूर होती है।
ग्रहण में नियमों का करें पालन
आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि ग्रहण काल में भोजन, शयन, गोदोहन, क्षेत्रभ्रमण, वनस्पतिच्छेदन, हलचालन, मलमूत्र त्यागादि, देवमूर्ति का स्पर्श निषिद्ध यानि वर्जित रहता है।
साथ ही गंगा स्नान या सामान्य जल में भी स्नान, दान, जप, होम तथा पितरों की प्रसन्नता के लिए श्राद्ध कर्म करने से अनंतानंत फलों की प्राप्ति होती है।
