विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

करोड़ों की लागत से बना अस्पताल पड़ा शो-पीस, सुपौल के सीएचसी में न इमरजेंसी न प्रसव सुविधा; आंदोलन की चेतावनी

Published: Tue, 08 Sep 2026 03:52 PM (IST)

करोड़ों की लागत से बने बसंतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सुपौल में इमरजेंसी, प्रसव और परिवार नियोजन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का अभाव है।

करोड़ों की लागत से बना अस्पताल पड़ा शो-पीस (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

करोड़ों की लागत से बना अस्पताल पड़ा शो-पीस (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. बसंतपुर सीएचसी में 4.74 करोड़ खर्च के बावजूद सुविधाओं का अभाव।

  2. इमरजेंसी, प्रसव, परिवार नियोजन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं अनुपलब्ध, मरीज रेफर।

  3. स्थानीय लोगों में आक्रोश, सुविधाओं के लिए आंदोलन की चेतावनी।

संवाद सहयोगी, वीरपुर (सुपौल)। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार बसंतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। करीब 4 करोड़ 74 लाख रुपये की लागत से तैयार इस अस्पताल से क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर एवं आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी। 

भवन निर्माण पूरा होने और अस्पताल का संचालन शुरू होने के बावजूद यहां अब तक इमरजेंसी, प्रसव एवं परिवार नियोजन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।

संसाधनों की कमी का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अस्पताल में अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वर्तमान में एक प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, पांच चिकित्सक, एक एएनएम एवं एक फार्मासिस्ट के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र का संचालन किया जा रहा है। 

लोगों का कहना है कि गंभीर मरीजों एवं प्रसव पीड़ित महिलाओं को बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है। स्थानीय लोगों ने बसंतपुर सीएचसी के लिए उपलब्ध एंबुलेंस का उपयोग वीरपुर अनुमंडलीय अस्पताल में किया जा रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर आपात स्थिति में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय

लोगों का कहना है कि भीमनगर की भौगोलिक एवं सामरिक स्थिति को देखते हुए यहां पूर्ण सुविधायुक्त अस्पताल की आवश्यकता और भी अधिक है। क्षेत्र में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस का प्रशिक्षण केंद्र, एसएसबी कैंप तथा भारत-नेपाल सीमा होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय है। 

स्थानीय लोगों के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से संबंधित समस्या से जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक अपेक्षित व्यवस्था नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि पूर्व में संचालित पीएचसी में सामान्य इलाज की सुविधा अपेक्षाकृत बेहतर थी, जबकि नए सीएचसी में आवश्यक संसाधनों की कमी बनी हुई है।

बोले प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

इस संबंध में बसंतपुर सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. अर्जुन चौधरी ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों एवं आवश्यक सुविधाओं की कमी से संबंधित जानकारी सिविल सर्जन को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि आवश्यक चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं अन्य संसाधन उपलब्ध होने तक फिलहाल ओपीडी सेवा के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

आंदोलन की चेतावनी

स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बीरेंद्र गिरी, इंद्रजीत गुप्ता, श्रवण साह, चंदन राउत, सोहन चौधरी, जितेंद्र सिन्हा, पूर्व उपमुखिया कन्हैया राम, पंचायत समिति सदस्य परवेज अहमद, वार्ड सदस्य रवि राय, हरेराम सिंह आदि का कहना है कि यदि जल्द बसंतपुर सीएचसी में इमरजेंसी, प्रसव, परिवार नियोजन, पर्याप्त चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं एंबुलेंस सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो आंदोलन किया जाएगा। 

लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित अस्पताल का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब क्षेत्र के लोगों को इसका समुचित लाभ मिले। लोगों ने सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सीएचसी में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है।