अनंत चतुर्दशी: 14 गांठों वाले डोरे में छिपा है 14 लोकों का रहस्य, धन और संतान प्राप्ति के लिए ऐसे करें पूजा
अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है, जिसमें भक्त 14 गांठों वाला अनंत डोरा धारण करते हैं। ...और पढ़ें

अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की विशेष आराधना, भक्त बांधेंगे 14 गांठों वाला डोरा (AI Generated Image)
HighLights
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जाता है।
भगवान विष्णु की पूजा कर 14 गांठों वाला अनंत डोरा धारण करें।
यह व्रत धन और संतान प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी होता है।
संवाद सूत्र, करजाईन बाजार (सुपौल)। आदिकाल से ही यह मान्यता प्रचलित है कि संसार का संचालन करने वाले प्रभु कण-कण में व्याप्त हैं। ईश्वर जगत में अनंत रूप में विद्यमान हैं। सृष्टि के पालनहार प्रभु की अनंतता का बोध कराने वाला कल्याणकारी व्रत अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के नाम से पूरे भारत में भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और भविष्यादि पुराणों के अनुसार यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना एवं कथा श्रवण का विधान है। इसमें उदयव्यापिनी तिथि ग्रहण की जाती है। यह व्रत विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है कि यह अनंत सृष्टि के कर्ता निर्गुण ब्रह्म की भक्ति का दिन है।
अनंत चतुर्दशी के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए आचार्य पंडित धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि इस दिन भक्त सांसारिक कार्यों से मन हटाकर ईश्वर भक्ति में लीन होते हैं।
इस अवसर पर वेद ग्रंथों का पाठ किया जाता है तथा भक्ति के प्रतीक रूप में अनंत का डोरा बांह में धारण किया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता है।
ऐसे करें पूजन
इस दिन अष्टदल कमल के आकार के कलश में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना की जाती है। इसके पास कुमकुम, केसर, हल्दी तथा 14 गांठों वाला रंगीन अनंत रखा जाता है। कुश से निर्मित अनंत की वंदना कर उसमें भगवान विष्णु का आह्वान एवं ध्यान किया जाता है।
इसके बाद गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य से विधिवत पूजन किया जाता है। इसके पश्चात अनंत चतुर्दशी की कथा का श्रवण किया जाता है। अंत में अनंत देव का ध्यान एवं मंत्रोच्चारण कर अनंत को दाहिनी भुजा में धारण किया जाता है।
14 गांठों वाला यह डोरा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फल प्रदान करने वाला माना जाता है। अनंत व्रत धन, संतान आदि की प्राप्ति के लिए भी किया जाता है। अनंत की 14 गांठें 14 लोकों की प्रतीक मानी जाती हैं। इस व्रत की कथा बंधु-बांधवों के साथ सुनने का विधान है।
अनंत पूजा का शुभ मुहूर्त
आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि शुक्रवार को अनंत पूजा के लिए पहला शुभ मुहूर्त प्रातःकाल से सुबह नौ बजे तक तथा दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजे से संध्याकाल तक रहेगा।
आचार्य ने बताया कि अनंत धारण करते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए, अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्व, अनंत रूपाय नमो नमस्ते। मंत्रोच्चारण के साथ अनंत धारण करना चाहिए। महिलाएं बाईं बांह और पुरुष दाईं बांह में अनंत धारण करते हैं।
