संवाद सूत्र, छातापुर(सुपौल): शिक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग द्वारा निरीक्षण किया जाता है। पदाधिकारी को निरीक्षण के क्रम में कई खामियां भी उजागर होती है फिर भी प्रखंड क्षेत्र के विद्यालयों में अध्यापकों से लेकर बच्चो के आने-जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। विभागीय निर्देश के आलोक में पदाधिकारियों ने क्षेत्र के कई विद्यालय का निरीक्षण किया। लेकिन मनमानी नहीं रुक सकी है। इतना ही नहीं विद्यालयों की सफाई व्यवस्था भी चौपट हो गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों की उदासीनता का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। फिर भी शिक्षा विभाग के आलाधिकारी मौन हैं। उन्हें बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में कारगर और सकरात्मक कदम उठाना चाहिए तभी बच्चों भविष्य सुरक्षित और संवर सकेगा। इस प्रखंड में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में जिलाधिकारी व जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा गुणवत्ता की जांच में बदहाली के संकेत मिलने के बाद भी यहां शिक्षक और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये जहां करोड़ों खर्च कर कई योजनाएं चला रही है। वहीं जमीनी हकीकत सरकारी दस्तावेजों से बिल्कुल अलग है। प्रखंड क्षेत्र के विद्यालयों में पठन-पाठन व्यवस्था का हाल बुरा है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है कहीं शिक्षकों की कमी है तो कहीं मध्याह्न भोजन बंद है। ऐसे में बच्चों की उपस्थिति पर भी असर पड़ रहा है।

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