-साल में दो बार आलू उगाते हैं किसान, नहीं मिलता उचित मूल्य

-भंडारण की नहीं है व्यवस्था, महंगी है सिचाई

संवाद सूत्र, जदिया(सुपौल): पिलुवाहा पंचायत के महोलिया (टपरा) गांव के आलू उत्पादक किसान अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर उद्धारक का बाट जोह रहे हैं। मालूम हो कि यहां के किसानों की मुख्य फसल आलू की खेती है। किसान अपने खेत में साल में दो बार आलू लगाते हैं लेकिन इस क्षेत्र में भंडारण की व्यवस्था नहीं रहने के कारण अन्य प्रदेशों से बीज लाना पड़ता है तो दूसरी तरफ आलू उत्पादन के समय भी भंडारण की व्यवस्था नहीं रहने के कारण आलू औने-पौने भाव में बेचना पड़ता है।

स्थानीय किसान किशन यादव, निर्मल यादव, अशोक यादव, उपेन्द्र यादव ने बताया कि आलू फसल की रोपनी के समय बीज 04-05 ह•ार रुपये प्रति क्विटल खरीदना पड़ा। फिलहाल 600 से 700 रुपये प्रति क्विटल बेचना पड़ रहा है। अच्छी कीमत नहीं मिलने के कारण हमलोगों को प्रति एकड़ 20 से 25 ह•ार रुपये का घटा हो रहा है। इसे प्रशासनिक स्तरीय पर कोई देखने वाला नहीं है।

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समस्याओं का है अंबार

आलू उत्पादकों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। इन किसानों के लिए समस्याओं का अंबार है। विभाग द्वारा किसानों को बीज मुहैया नहीं कराया जाता है एवं उत्पादित आलू की बिक्री की सरकारी व्यवस्था नहीं है। क्षेत्र में एक भी सरकारी बोरिग अथवा नलकूप नहीं रहने से सिचाई महंगी हो जाती है

। बिजली नहीं रहने के कारण डीजल पंपसेट से ही सिचाई करनी पड़ती है। अच्छी सड़क नहीं होने के कारण किसान अपनी फसल बाजार नहीं ले जा पाते हैं। इन सबके अलावा भंडारण के लिए शीतगृह नहीं होना किसानों के लिए बड़ी समस्या है।

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क्या कहते हैं अधिकारी

प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने बताया कि आलू से संबंधित अनुदान अथवा सरकारी सहायता ही जिला कृषि कार्यालय सुपौल से किसानों को मिलता है। जिला उद्यान को-ऑर्डिनेटर को आलू किसानों की समस्या से अवगत कराते हुए संबंधित पदाधिकारी को भी जानकारी दी गई है।

Posted By: Jagran

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