संवाद सूत्र, करजाईन बाजार(सुपौल): राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत शिक्षक रामविलास मेहता ने बिहार सरकार सहित जिला प्रशासन से जीवन यापन भत्ता की व्यवस्था कराने की मांग की है। वर्ष 2006 में रतनपुर पंचायत के ढेना स्थित संस्कृत विद्यालय से प्रधान शिक्षक के रूप में सेवानिवृत्त हुए रामविलास मेहता अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 5 सितंबर 1998 को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन के हाथों से उन्हें पुरस्कृत किया गया, लेकिन सेवानिवृति के पश्चात न तो उन्हें उपादान सेवा लाभ मिला और न ही सरकारी पेंशन मिल रहा है। इन्होंने बताया कि बिहार सरकार के शिक्षा नीति के अनुसार सेवानिवृति के उपरांत पेंशन योजना का प्रावधान नहीं है। इन्होंने दुख जताते हुए कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ भी उन्हें नहीं प्राप्त हो रहा है। जिसके चलते व्यक्तिगत कार्य एवं लेखन कार्य के लिए कागज-कलम के लिए भी आश्रितों पर निर्भर रहना पड़ता है। रामविलास मेहता ने बिहार सरकार सहित प्रशासनिक क्षेत्र के अधिकारियों से उनके लिए कम से कम जीवन यापन भत्ता की व्यवस्था कराने की मांग की है।

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