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बिहार में खाद के लिए अब 'नो टेंशन': ऐप से करें एडवांस बुकिंग, QR कोड दिखाते ही मिलेगी डिलीवरी

Published: Thu, 27 Aug 2026 07:00 AM (IST)

सिवान में किसानों को अब खाद खरीदने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा, वे मोबाइल ऐप के जरिए अपनी फसल और रकबा दर्ज कर खाद की बुकिंग कर सकेंगे।

बिहार में खाद के लिए अब 'नो टेंशन': ऐप से करें एडवांस बुकिंग, QR कोड दिखाते ही मिलेगी डिलीवरी (AI Generated Image)

बिहार में खाद के लिए अब 'नो टेंशन': ऐप से करें एडवांस बुकिंग, QR कोड दिखाते ही मिलेगी डिलीवरी (AI Generated Image)

HighLights

  1. किसान मोबाइल ऐप से अपनी जरूरत के अनुसार खाद बुक कर सकेंगे।

  2. बुकिंग के बाद क्यूआर कोड दिखाकर अधिकृत विक्रेता से खाद प्राप्त होगी।

  3. यह नई पारदर्शी प्रणाली सिवान में 1 सितंबर से लागू की जाएगी।

जागरण संवाददाता, सिवान। उर्वरक खरीदने के लिए जिले के किसानों को अब खाद की उपलब्धता और मात्रा को लेकर परेशान नहीं होना पड़ेगा। केंद्र सरकार की नई खाद बिक्री आवेदन प्रणाली ऐप के तहत किसान मोबाइल से अपनी फसल और रकबा दर्ज कर खाद की जरूरत के अनुसार पहले से बुकिंग कर सकेंगे।

बुकिंग के बाद जारी क्यूआर कोड दिखाकर अधिकृत खुदरा विक्रेता से निर्धारित मात्रा में खाद प्राप्त की जा सकेगी। उर्वरक विभाग भारत सरकार तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से फ्रेमवर्क फार फर्टिलाइजर सेल ऐपकेशन सिस्टम (एफएसएएस) नामक एक डिजिटल प्रणाली विकसित की जा रही है।

यह मोबाइल ऐप आधारित ऑनलाइन व्यवस्था है। इसका उद्देश्य उर्वरक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित, किसान केंद्रित एवं मांग आधारित बनाना है। इस व्यवस्था काे आगामी एक सितंबर से जिले में लागू कर दिया जाएगा।

अपनी आवश्यकता के अनुसार मात्रा का चयन कर बुकिंग करेंगे किसान:

इसके तहत किसान की किसान पहचान संख्या, भूमि और फसल संबंधी जानकारी का उपयोग कर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की सामान्य उर्वरक अनुशंसा के अनुसार पूरे फसल मौसम के लिए खाद की प्रस्तावित मात्रा प्रदर्शित होगी।

किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार मात्रा का चयन कर बुकिंग कर सकेंगे। एक बार जारी क्यूआर कोड तीन दिनों तक ही मान्य रहेगा। इसके बाद स्वतः निरस्त हो जाएगा।

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसान की वास्तविक जरूरत के अनुसार खाद की बुकिंग और वितरण होगा, इससे कालाबाजारी, अनियमित वितरण और जरूरत से अधिक खाद उठाव पर नियंत्रण लगेगा।

हेल्प डेस्क से तीन से पांच दिनों में किया जाएगा समस्या का समाधान:

इस व्यवस्था का लाभ उन किसानों को भी मिलेगा, जिनकी जमीन स्वयं के नाम, पूर्वजों के नाम या जमाबंदी में दर्ज नहीं है। बटाईदार और सामुदायिक, मंदिर, सरकारी या संस्थागत भूमि पर खेती करने वाले किसानों के लिए भी व्यवस्था की गई है।

किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पंचायत से जिला स्तर तक तंत्र बनाया जाएगा। कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार दो कार्य दिवस में समस्या का समाधान करेंगे।

प्रखंड स्तर पर तीन, अनुमंडल स्तर पर पांच और जिला स्तर पर संबंधित अधिकारियों के माध्यम से समाधान कराया जाएगा। जिला एवं प्रखंड स्तर पर हेल्प डेस्क या नियंत्रण कक्ष भी बनाए जाएंगे।